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झारखंड टीचर नियुक्ति मामले में जांच कमेटी को सौंपा नियुक्ति का पूरा ब्योरा, 30 मई को होगी अगली सुनवाई

Published: Sat, 23 May 2026 06:38 PM (IST)

स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े नियुक्ति विवाद की सुनवाई के दौरान वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट। (जागरण)

झारखंड हाई कोर्ट। (जागरण)

HighLights

  1. राज्य सरकार ने नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए।

  2. प्रार्थियों ने प्रस्तुत आंकड़ों में अंतर पर आपत्ति जताई।

  3. आयोग ने प्रार्थियों से बिंदुवार जवाब दाखिल करने को कहा।

राज्य ब्यूरो, रांची। स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े नियुक्ति विवाद की सुनवाई के दौरान वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने हाई कोर्ट के पुराने भवन में शनिवार को सुनवाई की।

इस दौरान राज्य सरकार की ओर नियुक्ति से संबंधित सारा दस्तावेज प्रस्तुत किया गया। इस आकड़ों में अंतर होने का दावा करते हुए प्रार्थियों की ओर से आपत्ति जताई गई।

इसके बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने इस पर प्रार्थियों को बिंदुवार जवाब दाखिल करने को कहा।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से नियुक्त अभ्यर्थियों का विस्तृत डाटा शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। जिसमें जिला एवं राज्यस्तर पर बनी मेरिट लिस्ट के आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति का पूरा ब्योरा था।

प्रार्थियों जब इस डाटा का अवलोकन किया, तो पाया कि एक ओर 12,739 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का उल्लेख है, जबकि हाई कोर्ट में दायर शपथ पत्र में यह संख्या 12046 बताई गई है।

30 मई को होगी अगली सुनवाई

उनकी आपत्ति पर आयोग ने प्रार्थी के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के आधार पर बिंदुवार अपनी लिखित आपत्ति दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 30 मई को निर्धारित की गई है।

प्रार्थियों को ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार सिन्हा, अमृतांश वत्स और आकाश अजीत कुमार ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई में आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह संबंधित नियुक्ति परीक्षा की स्टेट मेरिट लिस्ट, चयनित अभ्यर्थियों के नाम, प्राप्तांक, नियुक्ति तिथि समेत सभी आवश्यक विवरण प्रस्तुत करे।

बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी व अन्य की याचिका (257 मामलों) पर सुनवाई करते हुए इस प्रकरण की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था और तीन माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

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