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दौड़ में तीन सेकंड की देरी पर दिव्यांग को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: झारखंड हाई कोर्ट

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:47 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने दुमका में चौकीदार नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि शारीरिक परीक्षा ...और पढ़ें

अदालत ने सरकार को आठ सप्ताह में नियुक्ति पत्र देने को कहा।

अदालत ने सरकार को आठ सप्ताह में नियुक्ति पत्र देने को कहा।

HighLights

  1. दिव्यांग अभ्यर्थी को तीन सेकंड की देरी पर नौकरी से वंचित नहीं।

  2. हाई कोर्ट ने नियुक्ति का हकदार माना, आठ सप्ताह में पत्र जारी।

  3. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत उचित सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि चौकीदार नियुक्ति की दौड़ में महज तीन सेकंड की देरी किसी दिव्यांग अभ्यर्थी को नौकरी के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती।

अदालत ने दुमका चौकीदार नियुक्ति मामले में सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति का हकदार मानते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

मामला जिले में चौकीदार के 328 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता दिव्यांग श्रेणी की अभ्यर्थी थी और लिखित परीक्षा में सफल हुई थी। इसके बाद आयोजित शारीरिक परीक्षा में उसे सामान्य अभ्यर्थियों के साथ ही दौड़ में शामिल किया गया। उसे दिव्यांगता के अनुरूप न तो अतिरिक्त समय दिया गया और न ही कोई विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई।

याचिकाकर्ता ने 10 मिनट तीन सेकंड में दौड़ पूरी की थी। निर्धारित समय से महज तीन सेकंड अधिक लगने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत को बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2 और धारा 20 के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों को उचित सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले विकास कुमार बनाम संघ लोक सेवा आयोग का भी हवाला दिया।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों में दिव्यांग अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय देने का कोई प्रविधान नहीं है। हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई नियम या सरकारी अधिसूचना संसद द्वारा बनाए गए कानून के प्रविधानों के विपरीत नहीं हो सकती।

अदालत ने माना कि दिव्यांग अभ्यर्थी को उसकी जरूरत के अनुरूप उचित सुविधा उपलब्ध नहीं कराना कानून के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 13 पदों में से 11 पद अब भी रिक्त हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को चौकीदार पद पर नियुक्ति का हकदार घोषित किया और आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया।

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