झारखंड में 50 साल से क्यों अटका है भूमि सर्वे, बताएं कब तक पूरा होगा? हाई कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
झारखंड हाई कोर्ट ने 50 साल से लंबित भूमि सर्वे कार्य में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

भूमि सर्वे में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, राजस्व सचिव से मांगी व्यक्तिगत रिपोर्ट।
HighLights
झारखंड हाई कोर्ट ने 50 साल से लंबित भूमि सर्वे पर नाराजगी जताई।
राजस्व सचिव को 15 जुलाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
सर्वे प्रगति, नई तकनीक और पूर्ण होने की समय-सीमा बताने को कहा।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य में भूमि सर्वेक्षण की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में 50 वर्षों से लंबित भूमि सर्वेक्षण कार्य में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।
अदालत ने पूछा कि जब पिछली सुनवाई में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को स्वयं शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो उनकी जगह विभाग के अवर सचिव ने हलफनामा क्यों दाखिल किया।
हाई कोर्ट ने सचिव को 15 जुलाई तक व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर राज्य में भूमि सर्वे की प्रगति, नई तकनीक के उपयोग और सभी जिलों में सर्वे कार्य पूरा होने की समय-सीमा बताने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने 17 जून 2025 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि तब सरकार को चार सप्ताह के भीतर भूमि सर्वे के लिए नई तकनीक अपनाने की प्रक्रिया पूरी करने तथा उसके छह माह के भीतर पूरे राज्य में सर्वेक्षण कार्य संपन्न करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी अब तक आदेश का पालन नहीं हुआ है।
इस पर महाधिवक्ता रोहितश्य राय ने अदालत से समय देने का आग्रह करते हुए कहा कि विभागीय सचिव स्वयं शपथपत्र दाखिल करेंगे। सरकार की ओर से पूर्व में दाखिल शपथपत्र में बताया गया था कि केरल, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में अपनाई जा रही आधुनिक भूमि सर्वे तकनीक का अध्ययन किया जा रहा है।
नई तकनीक के माध्यम से पुराने भू-अभिलेखों का डिजिटाइजेशन कर सर्वे कार्य को तेज किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा था कि वर्तमान तकनीक काफी पुरानी होने के कारण सर्वेक्षण कार्य में कठिनाई आ रही है।
1975 से भूमि सर्वेक्षण का कार्य चल ही रहा?
इस पर हाई कोर्ट ने कहा था कि समयबद्ध तरीके से भूमि सर्वे पूरा होने से आम लोगों की जमीन के साथ-साथ सरकारी भूमि की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि झारखंड में वर्ष 1975 से भूमि सर्वेक्षण का कार्य शुरू हुआ, लेकिन लगभग 50 वर्ष बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है।
इसलिए आवश्यक मानव संसाधन की नियुक्ति और आधुनिक तकनीक अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए। इस संबंध में प्रार्थी गोकुल चंद ने जनहित याचिका दाखिल की है। जिसमें कहा है कि राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था।
इसके बाद 1980 से नए सिरे से सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन आज तक पूरी नहीं हो सकी। सरकार ने अदालत को बताया था कि लातेहार और लोहरदगा सहित दो जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में कार्य जारी है।
