रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट ने 21 साल से कम उम्र के युवाओं को शराब के नशे दूर रखने के मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस एचसी मिश्र व जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने सरकार से पूछा है कि 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब के नशे से दूर रखने की उनके पास क्या योजनाएं हैं। संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों से बातचीत कर राज्य सरकार इस पर सुझाव दे, ताकि युवाओं में शराब की लत की समस्या से निपटा जा सके। इस संबंध में शिवकांत पांडेय की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि युवा किस तरह शराब के नशे के चंगुल में फंसते जा रहे हैैंं, यह किसी से छिपा नहीं है। सरकार के पास युवाओं को शराब के नशे से दूर रखने का कोई मैकेनिज्म (प्रणाली) नहीं है। सरकार ने शराब बेचने के आदेश में यह तो लिख दिया है कि 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब नहीं बेचना है, लेकिन सिर्फ आदेश में लिख देना ही काफी नहीं है। शराब के नशे से युवाओं को कैसे बचाया जाए, इसपर विचार करने की जरूरत है। 22 नवंबर तक सरकार को अदालत में जवाब दाखिल करना है।

सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता आरआर मिश्र ने अदालत को बताया कि शराब विक्रेता अपने फायदे के लिए स्कूल- कॉलेजों के विद्यार्थियों को शराब बेचते हैं। झारखंड गठन के 19 साल में राज्य सरकार ने युवाओं में शराब की लत को लेकर उनपर हो रहे बुरे असर को लेकर कोई सामाजिक सर्वे नहीं कराया है। कोई एनजीओ भी इसपर काम नहीं कर रहा है।

हाल में ही सरकार ने शराब बेचने को लेकर गाइडलाइन जारी की है, जिसमें मात्र एक बार ही युवाओं को शराब बेचने के प्रतिबंध को हटा लिया गया है। अब स्कूल जाने वाले छात्रों को भी शराब की लत लगने लगी है। नशे के कारण वे आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो रहे हैं। शहर में शाम में युवा दोपहिया वाहनों पर बैठकर शराब पीते नजर आते हैं। युवा देश की ताकत हैं, उन्हें शराब के नशे से दूर रखने की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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