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स्त्रीधन पर पत्नी का अधिकार बरकरार, बिना सहमति संयुक्त बैंक लॉकर चलाने से पति को झारखंड हाई कोर्ट ने रोका

Published: Sat, 29 Aug 2026 09:32 PM (IST)

Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में संयुक्त बैंक लॉकर में रखे स्त्रीधन पर पत्नी के अधिकार को बरकरार रखा है।

स्त्रीधन पर पत्नी का हक बरकरार। (प्रतीकात्मक फोटो)

स्त्रीधन पर पत्नी का हक बरकरार। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. संयुक्त बैंक लॉकर में स्त्रीधन पर पत्नी का अधिकार।

  2. पति पत्नी की सहमति बिना लॉकर नहीं चला सकता।

  3. बोकारो फैमिली कोर्ट का फैसला हाई कोर्ट ने रखा बरकरार।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने पति-पत्नी के बीच स्त्रीधन को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बैंक लाकर में रखे पत्नी के गहनों पर उसके अधिकार को बरकरार रखा है। अदालत ने पति को पत्नी की सहमति और जानकारी के बिना संयुक्त बैंक लाकर संचालित करने से रोक दिया।

अदालत ने बोकारो फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2024 के आदेश को सही ठहराते हुए पति की ओर से दायर अपील खारिज कर दी। बोकारो निवासी एके सिंह ने हाई कोर्ट में फैमिली कोर्ट के आदेश को खिलाफ अपील दायर की थी।

करीब 25 लाख के गहने लाकर में रखने का दावा

मामला बोकारो के यूनियन बैंक आफ इंडिया की शाखा के लाकर से संबंधित है। यह लाकर एके सिंह और उनकी पत्नी पी राज के नाम संयुक्त रूप से दर्ज था। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में दावा किया था कि उनके मायके और ससुराल पक्ष से मिले उपहारों के करीब 25 लाख रुपये मूल्य के सोने और अन्य आभूषण, जो उनका स्त्रीधन हैं, सुरक्षा के उद्देश्य से इस लाकर में रखे गए थे।

विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और पत्नी ने अपना वैवाहिक घर छोड़ दिया। इसके बाद उनका स्त्रीधन लाकर में ही रह गया। पत्नी का आरोप था कि बार-बार मांग करने के बाद पति ने उनके आभूषण वापस नहीं किए। इसके बाद उन्होंने अपने स्त्रीधन की सुरक्षा और उनकी सहमति के बिना लाकर के संचालन पर रोक लगाने के लिए बोकारो फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की।

पति ने कहा- लाकर में मां और बहन के भी गहने

पति ने पत्नी के आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि पत्नी अपना पूरा स्त्रीधन अपने साथ ले गई थी। उसने यह भी कहा कि लाकर में उसकी मां, बहन और भाभी के गहने रखे हुए हैं। इसलिए लाकर को केवल पत्नी के स्त्रीधन से जुड़ा मानना उचित नहीं है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पति के इस दावे को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पाया कि पति अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। उसने अपनी मां, बहन या भाभी में से किसी को भी यह साबित करने के लिए गवाह के रूप में अदालत के सामने पेश नहीं किया कि लाकर में उनके आभूषण रखे गए थे।

पत्नी का बयान विश्वसनीय, पति के दावे का ठोस प्रमाण नहीं

खंडपीठ ने पत्नी के बयान और उपलब्ध तथ्यों को विश्वसनीय माना। अदालत ने यह माना कि पति के परिवार की ओर से दिए गए साक्ष्य से भी यह बात सामने आई कि संबंधित लाकर विवाह के बाद ही संचालित किया गया था। ऐसे में पति की ओर से लाकर में उसके परिवार की महिलाओं के गहने होने का दावा पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं

सभी तथ्यों और साक्ष्य पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2024 में बोकारो फैमिली कोर्ट की ओर से पारित आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। खंडपीठ ने पत्नी के स्त्रीधन के अधिकार को मान्यता देते हुए पति को उसकी सहमति या जानकारी के बिना संयुक्त लाकर संचालित करने से रोक दिया। इसके साथ ही पति की प्रथम अपील कोर्ट ने खारिज कर दी।

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