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'किस तारीख को होगा JET 2024 का एग्जाम?', झारखंड हाई कोर्ट ने JPSC को लगाई फटकार

Published: Thu, 12 Feb 2026 08:17 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने जेट 2024 परीक्षा तिथि पर जेपीएससी की अस्पष्टता पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश एमएस ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट ने मांगा जवाब। (जागरण)

झारखंड हाई कोर्ट ने मांगा जवाब। (जागरण)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जेट 2024 परीक्षा तिथि पर नाराजगी जताई।

  2. जेपीएससी सचिव से ठोस तैयारी और तिथि पर जवाब मांगा।

  3. 1.75 लाख आवेदकों के बावजूद परीक्षा में देरी पर सवाल।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (जेट) 2024 की परीक्षा तिथि की स्पष्ट जानकारी नहीं देने पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई है।

अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के सचिव से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि जेट 2024 की परीक्षा तिथि क्या है और इसके आयोजन को लेकर अब तक क्या-क्या ठोस तैयारियां की गई हैं।

सुनवाई के दौरान जेपीएससी के अपर सचिव की ओर से मार्च माह में संभावित परीक्षा होने की बात कही गई, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और इसे टालमटोल का संकेत माना।

खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब इस परीक्षा के लिए 1,75,000 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है और दिसंबर 2025 में आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है तो ढाई महीने बीत जाने के बाद भी परीक्षा क्यों नहीं कराई गई।

अदालत ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से जेट आयोजित नहीं हुई है, जिससे प्रतीत होता है कि आयोग इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।

यह मामला असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि जेट 2024 आयोजित की जा रही है और इसका परिणाम शीघ्र जारी किया जाएगा।

इसके बाद विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि जेट के सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देने के लिए ही अब तक विश्वविद्यालयों में नियुक्ति विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।

बता दें कि प्रार्थी अनिकेत ओहदार एवं अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसरों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है।

आरोप है कि संविदा के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। प्रार्थियों ने संविदा नियुक्तियों के बजाय नियमित बहाली की मांग की है।

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