लॉकडाउन में हुई थी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, तीन साल बाद भी जांच सुस्त; झारखंड हाईकोर्ट ने CID को लगाई फटकार
झारखंड हाई कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान पलामू समेत पूरे राज्य में हुई अवैध पेड़ कटाई की सीआईडी जांच की ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में नाराजगी जताई।
लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ काटे गए।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने कोरोना संक्रमण के दौरान लागू लॉकडाउन में पलामू सहित पूरे झारखंड में बड़े पैमाने पर कथित अवैध पेड़ कटाई के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की जांच की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई।
इस मामले में अदालत ने सीआईडी को मामले में दोबारा जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले की जांच सीआइडी को सौंपी गई है, लेकिन जांच की गति काफी धीमी है।
इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सितंबर 2023 में दिए गए आदेश के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। कोर्ट ने सीआईडी से जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला पलामू जिले के पांकी थाना में वर्ष 2022 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप है कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान वन विभाग की कथित मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की गई थी। मामले की जांच पहले स्थानीय स्तर पर चल रही थी, बाद में इसे सीआईडी को सौंप दिया गया।
मामले में पलामू निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा और अद्या मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जांच की धीमी गति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
अदालत ने सीआईडी की ओर से दाखिल जवाब को पर्याप्त नहीं मानते हुए दोबारा जवाब देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित इस मामले की जांच में अपेक्षित प्रगति होनी चाहिए।
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