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अलकतरा घोटाले के ट्रायल में देरी पर झारखंड हाई कोर्ट ने सीबीआई को लगाई फटकार, एकीकृत बिहार का मामला

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:53 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने एकीकृत बिहार के अलकतरा घोटाले के ट्रायल में देरी पर सीबीआई की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी ...और पढ़ें

राज्य के एमपी-एमएलए से संबंधित लंबित मामलों में सुनवाई।

राज्य के एमपी-एमएलए से संबंधित लंबित मामलों में सुनवाई।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने अलकतरा घोटाले के ट्रायल में देरी पर नाराजगी जताई।

  2. सीबीआई को गवाहों को अदालत में तेजी से पेश करने का निर्देश।

  3. घोटाले के 32 में से 12 आरोपी ट्रायल के दौरान मर चुके।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने एकीकृत बिहार के अलकतरा घोटाले में करीब तीन दशक बाद भी मुकदमे का ट्रायल पूरा नहीं होने पर सीबीआइ की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। घोटाले के 32 आरोपितों में से 12 की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि शेष 20 आरोपितों के खिलाफ अब भी मुकदमा चल रहा है।

इस स्थिति पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सीबीआइ दस्तावेज जुटाने में ही पूरा समय लगा देती है, लेकिन ट्रायल के दौरान गवाहों को अदालत में पेश करने में तेजी नहीं दिखाती। अदालत ने एमपी-एमएलए से जुड़े लंबित 11 मामलों में से दो मामलों का रिकार्ड निचली अदालत से तलब किया है।

अदालत ने बुधवार को सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि वर्ष 1997 में एकीकृत बिहार के समय अलकतरा घोटाला हुआ था। सीबीआइ ने जांच के बाद इस मामले में कुल 32 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपितों में तत्कालीन मंत्री इलियास हुसैन का नाम भी शामिल है।

सुनवाई के दौरान जब अदालत को बताया गया कि ट्रायल लंबा खिंचने के कारण 32 आरोपितों में से 12 की मौत हो चुकी है और बाकी 20 के खिलाफ अब भी सुनवाई जारी है, तो पीठ ने गंभीर नाराजगी जताई।

अदालत ने कहा कि मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए सीबीआइ को गंभीरता दिखानी चाहिए। केवल दस्तावेज इकट्ठा करने से मुकदमे का निपटारा नहीं होगा। गवाहों को समय पर अदालत में पेश करना भी जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का तेजी से निष्पादन करने का निर्देश दिया है। इसके बाद भी झारखंड में ऐसे कई मामले वर्षों से ट्रायल के स्तर पर लंबित हैं।

हाई कोर्ट इसी क्रम में एमपी-एमएलए से जुड़े मामलों की निगरानी कर रहा है। सुनवाई के दौरान सीबीआइ की ओर से अदालत को बताया गया कि सांसदों और विधायकों से जुड़े कई मामलों में गवाह अपने बताए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं। इस कारण भी ट्रायल प्रभावित हो रहा है।

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