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झारखंड हाई कोर्ट ने जल स्रोतों पर अतिक्रमण की रिपोर्ट मांगी, पुल-पुलिया गिरने पर फैसला सुरक्षित

Published: Fri, 02 Oct 2026 01:56 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने जल स्रोतों पर अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मामले की ...और पढ़ें

जिला स्कूल में पानी की टंकी गिरने का भी उठा मामला, 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई।

जिला स्कूल में पानी की टंकी गिरने का भी उठा मामला, 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई।

HighLights

  1. जल स्रोतों पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।

  2. जिला स्कूल में पानी टंकी गिरने से मौत का मामला उठा।

  3. पुल-पुलिया गिरने के मामले में हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में रांची में जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार और न्याय मित्र इंद्रजीत सिन्हा से अब तक कोर्ट के आदेश के तहत की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।

इस दिन अदालत के निर्देश के बाद दाखिल रिपोर्ट और अब तक हुई कार्रवाई, संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि रांची के तीन प्रमुख जलाशयों धुर्वा डैम, कांके डैम और गेतलसूद डैम के लिए अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित रिपोर्ट रांची के उपायुक्त की ओर से दाखिल कर दी गई है।

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से धुर्वा डैम परियोजना की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित प्राथमिकी की जांच की सीलबंद रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। एसीबी ने कोर्ट को बताया था कि सात जनवरी के आदेश के बाद नगड़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच जारी है।

हाई कोर्ट ने रांची के उपायुक्त को तीनों डैम परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि का विस्तृत विवरण शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने अधिग्रहित जमीन का सटीक रकबा, नक्शा, संबंधित सर्वे नंबर, जमीन पर हुए अतिक्रमण का पूरा विवरण और अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।

रांची में पानी टंकी गिरने से मौत का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता झारखंड सिविल सोसाइटी की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारूका ने रांची जिला स्कूल में पानी की पुरानी टंकी तोड़कर नई टंकी बनाने के दौरान दो मजदूरों की मौत का मामला उठाया।

उन्होंने अदालत को बताया कि निर्माण कार्य के दौरान हुई यह घटना पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और संबंधित ठेकेदार की लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।

पुल-पुलिया गिरने के मामले में हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में राज्य में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से निर्मित पुल-पुलियों के गिरने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

अदालत ने प्रार्थी और राज्य सरकार को पांच अक्टूबर तक लिखित पक्ष देने को कहा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को बताया कि पुल-पुलियों के गिरने की घटनाओं को सरकार ने गंभीरता से लिया है।

ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।

प्रार्थी पंकज कुमार यादव की ओर से दाखिल जनहित याचिका में राज्य में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बनाए गए पुल-पुलियों के गिरने की घटनाओं की जांच की मांग की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्यों में अनियमितता और लापरवाही के कारण कई पुल-पुलिया गिर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। प्रार्थी ने इन मामलों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का भी आग्रह किया है। 

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