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टीजीटी शिक्षकों को हाई कोर्ट से राहत: फरवरी 2019 से मानी जाएगी नियुक्ति तिथि, 12 हफ्तों में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

Published: Sat, 31 Oct 2026 10:10 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के तहत नियुक्त 34 शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। ...और पढ़ें

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी के लिए शिक्षक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं।

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी के लिए शिक्षक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं।

HighLights

  1. वरीयता, वेतन वृद्धि सहित सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएंगे।

  2. राज्य सरकार को 12 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश।

राज्‍य ब्‍यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के तहत नियुक्त 34 शिक्षकों को एक बड़ी राहत दी है। 
 
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी के लिए शिक्षक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन प्रार्थी शिक्षकों की नियुक्ति की तिथि फरवरी 2019 से मानी जाए। 
 
इसके साथ ही उन्हें वरीयता, वेतन वृद्धि, उच्चतर वेतनमान और वेतन निर्धारण जैसे सभी परिणामी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं, हालांकि इस अवधि का बकाया वेतन देय नहीं होगा।
 

क्या है पूरा मामला? 

यह पूरा मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) नियुक्ति से जुड़ा है। 
 
याचिकाकर्ताओं ने इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, शारीरिक शिक्षा, कुड़ुख, संस्कृत, नागपुरी, अंग्रेजी, गणित, भौतिकी, जीव विज्ञान, रसायन और हिंदी सहित विभिन्न विषयों के लिए आवेदन किया था।
 
इसी चयन प्रक्रिया के तहत कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति लातेहार जिले में फरवरी 2019 में ही हो गई थी, जबकि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर वर्ष 2023 में हुई। 
 
विलंब का मुख्य कारण 13 अनुसूचित जिलों में शत-प्रतिशत स्थानीय निवासी आरक्षण से जुड़ा विवाद था। वर्ष 2020 में हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा इस व्यवस्था को रद्द किए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 
 
सर्वोच्च अदालत के निर्देशानुसार, नई भर्ती निकालने के बजाय वर्ष 2016 के विज्ञापन के आधार पर ही संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार की गई। 
 
जिसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ताओं को 2023 में नियुक्ति मिली। बाद में नियुक्ति मिलने के कारण उन्हें वरीयता और अन्य सेवा लाभों में भारी नुकसान हो रहा था।
 

अदालत की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश 

 
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति में यह देरी पूरी तरह मुकदमेबाजी के कारण हुई थी, जिसमें शिक्षकों की कोई गलती नहीं थी। 
 
अदालत ने अपने पूर्व के 'अजय कुमार मामले' के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि वे उसी चयन प्रक्रिया का हिस्सा थे जिसके तहत अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति फरवरी 2019 में हुई थी। 
 
इसलिए केवल नियुक्ति आदेश बाद में जारी होने के कारण उन्हें वरीयता से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि शिक्षकों को सेवा लाभ न देना संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन होगा। 
 
इसके मद्देनजर कोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षकों को वर्ष 2019 से नियुक्ति की काल्पनिक तिथि (नोशनल डेट) देने का आदेश दिया है और पूरी प्रक्रिया को 12 सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।

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