NTPC अधिकारियों को बड़ी राहत, झारखंड HC ने रद की आपराधिक कार्यवाही; नौकरी का दबाव बनाने को किया था केस
झारखंड हाई कोर्ट ने एनटीपीसी के चार अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद कर दिया है। अदालत ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने सुनाया निर्णय, भुगतान नहीं देने का मामला।
HighLights
हाई कोर्ट ने एनटीपीसी के चार अधिकारियों को राहत दी।
आपराधिक कार्यवाही रद्द, शिकायत में कानूनी आधार नहीं मिला।
शिकायतकर्ता का मकसद नौकरी का दबाव बनाना संभव।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने एनटीपीसी के चार अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। अदालत ने 13 नवंबर 2025 के आदेश तथा निचली अदालत की पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
इस संबंध में एनटीपीसी के अधिकारी नीरज जलोटा, कमलराम रजक, पंकज ध्यानी और संगीत कुमार सेनापति की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अदालत में पक्ष रखा।
मामले में शिकायतकर्ता सज्जाद आलम ने आरोप लगाया था कि एनटीपीसी के अधिकारियों ने उन्हें कंप्यूटर प्रशिक्षण के काम के लिए नियुक्त किया था, लेकिन उनके अनुसार अनुबंध के मुताबिक काम नहीं कराया गया और भुगतान भी नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 25 मई 2024 को एनटीपीसी के अधिकारियों ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने और जेल भेजने की धमकी मारपीट और अपमानजनक बातें कहीं थी। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई थी।
चोट का उल्लेख नहीं, इसलिए धारा 323 पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि शिकायत में किसी प्रकार की शारीरिक चोट या दर्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में केवल आरोप के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत अपराध बनना संभव नहीं है।
अपमान का आरोप भी धारा 504 के तहत पर्याप्त नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महज अपमान या गाली देने का आरोप अपने आप में धारा 504 के तहत अपराध नहीं बनाता। इसके लिए यह दिखाना आवश्यक है कि आरोपित के कृत्य से पीड़ित को लोक शांति भंग करने के लिए उकसाने की स्थिति पैदा हुई हो।
नौकरी के दबाव में मामला दर्ज कराने की बात
सुनवाई के दौरान अदालत के सवालों के जवाब में शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि वह एनटीपीसी में नौकरी पाना चाहता था। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि अधिकारियों पर नौकरी देने का दबाव बनाने और बाद में प्रतिशोध की भावना से आपराधिक मामला दर्ज कराने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को सही मान लेने के बाद भी एनटीपीसी के अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक आपराधिक तत्व नहीं बनते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने चारों अधिकारियों के खिलाफ लंबित पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
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