रेलवे के टिकट परीक्षक कर्मियों के मामले में कैट का आदेश झारखंड हाई कोर्ट से निरस्त, फिर से भेजा गया ट्रिब्यूनल
झारखंड हाई कोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक कर्मचारियों की वरीयता से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के ...और पढ़ें

रेलवे टिकट परीक्षक वरीयता मामला: हाई कोर्ट ने कैट का आदेश किया निरस्त।
HighLights
हाई कोर्ट ने कैट का वरीयता संबंधी आदेश रद्द किया।
मामला नए सिरे से विचार के लिए ट्रिब्यूनल को भेजा।
स्वेच्छा से स्थानांतरित कर्मियों को संयुक्त कैडर में रखा जाएगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट में रेलवे के टिकट परीक्षक कर्मचारियों की वरीयता से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने कैट के आदेश को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया है। रेलवे ने कैट के 17 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामला रेलवे बोर्ड की ओर से वाणिज्यिक विभाग के विभिन्न पदों को एकीकृत कर संयुक्त कैडर बनाने के फैसले से जुड़ा है।
रेलवे बोर्ड ने 22 फरवरी 2018 को कमर्शियल क्लर्क, टीसी और इंक्वायरी सह रिजर्वेशन क्लर्क के पदों को चरणबद्ध तरीके से एकीकृत कर कमर्शियल सह टिकेटिंग स्टाफ का संयुक्त कैडर बनाने का निर्णय लिया था।
इसके बाद पांच अप्रैल 2019 को स्पष्ट किया गया कि 22 फरवरी 2018 तक कार्यरत कर्मचारियों की वरीयता पूर्व की व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग रखी जाएगी। वहीं, इसके बाद सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों पर संयुक्त कैडर की वरीयता व्यवस्था लागू होगी।
मामले में शामिल कर्मचारी 22 फरवरी 2018 से पहले रेलवे के अलग-अलग डिवीजन में टिकट परीक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2022 में इन कर्मचारियों ने अपनी इच्छा से इंटर-डिवीजन ट्रांसफर लेकर धनबाद डिवीजन में योगदान दिया।
रेलवे ने उन्हें डायरेक्ट रिक्रूटमेंट कोटे की रिक्तियों के विरुद्ध स्थानांतरित मानते हुए संयुक्त कैडर की वरीयता सूची में शामिल कर लिया।
धनबाद डिवीजन की ओर से नौ फरवरी 2023 को संयुक्त वरीयता सूची जारी की गई। इससे असंतुष्ट कर्मचारियों ने कैट में याचिका दायर की।
कैट ने 17 दिसंबर 2025 को वरीयता सूची को रद करते हुए संबंधित कर्मचारियों के लिए अलग वरीयता सूची जारी करने का निर्देश दिया था। रेलवे ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रेलवे के महाप्रबंधक हाजीपुर की ओर से आठ फरवरी 2023 को जारी स्पष्टीकरण में स्पष्ट किया गया था कि 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से दूसरे डिवीजन में स्थानांतरित होकर आने वाले कर्मचारियों की वरीयता यूनिफाइड, मर्ज्ड कैडर में निर्धारित की जाएगी।
कोर्ट ने माना कि संबंधित कर्मचारी 22 फरवरी 2018 के बाद स्वेच्छा से धनबाद डिवीजन में स्थानांतरित होकर आए थे। ऐसे में उन्हें संयुक्त कैडर की वरीयता सूची में शामिल करना रेलवे के आठ फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण के अनुरूप था। इसलिए नौ फरवरी 2023 को जारी संयुक्त वरिष्ठता सूची को रद करने का कैट का निर्णय उचित नहीं था।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।