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झारखंड हाई कोर्ट ने रेलवे को दिया अल्टीमेटम, पलामू में 4 महीने में पूरा करें अंडरपास का निर्माण

Published: Thu, 22 Oct 2026 09:40 AM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे अंडरपास के निर्माण को चार महीने ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

झारखंड हाईकोर्ट (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने रेलवे को अंडरपास निर्माण का निर्देश दिया।

  2. पलामू में चार महीने में काम पूरा करने का आदेश।

  3. बरसात में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करें।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने पलामू के विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे लाइन पार करने में ग्रामीणों को हो रही परेशानी पर रेलवे को अहम निर्देश दिया है। 

अदालत ने कहा है कि यदि रेलवे अंडरपास का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, तो उसे चार महीने के भीतर पूरा किया जाए। बरसात में अंडरपास में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान भी किया जाए, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़े। इसके बाद खंडपीठ ने लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया। 

18 मार्च 2027 को सुनवाई निर्धारित

अदालत ने रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) या मानवयुक्त रेलवे क्रासिंग बनाने का आदेश देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्माण की जरूरत और तकनीकी उपयुक्तता तय करना विशेषज्ञों और संबंधित विभागों का काम है। 

अदालत ने रेलवे अधिकारियों को 12 मार्च 2027 तक अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अनुपालन की समीक्षा के लिए 18 मार्च 2027 को सुनवाई निर्धारित की गई है।

रेलवे ने कहा- ओवरब्रिज बनाने की शर्तें पूरी नहीं

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से बताया गया कि लालगढ़ बिहार रेलवे स्टेशन और पांजरिकला के बीच रेलवे लाइन पार करने के लिए ग्रामीण लंबे समय से मानवयुक्त रेलवे क्रासिंग या ओवरब्रिज की मांग कर रहे हैं। इस स्थान पर लोग अनधिकृत तरीके से रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

रेलवे के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत नई रेलवे क्रासिंग खोलने की नीति नहीं है। रेलवे दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुरानी क्रासिंग को भी धीरे-धीरे समाप्त कर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। 

खर्च में हिस्सेदारी की सहमति नहीं 

संबंधित स्थान पर ओवरब्रिज बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से खर्च में हिस्सेदारी की सहमति भी नहीं मिली है। रेलवे ने यह भी कहा कि संबंधित जगह ओवरब्रिज निर्माण के लिए निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि अंडरपास बनने के बाद ग्रामीणों की परेशानी दूर नहीं होगी, क्योंकि बरसात के दौरान उसमें पानी भर जाता है। इससे स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों को आने-जाने में कठिनाई होती है। ऐसी स्थिति में लोगों के सामने रेलवे ट्रैक पार करने या पानी से भरे अंडरपास से गुजरने का जोखिम रहता है। याचिकाकर्ता ने इसे देखते हुए ओवरब्रिज बनाने की मांग की।

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