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ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में FIR मामले में झारखंड सरकार पर हाई कोर्ट का 8 हजार का जुर्माना

Published: Mon, 02 Nov 2026 02:22 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी मामले में राज्य सरकार पर जवाब दाखिल न करने पर ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट का सख्त रुख, अब 9 दिसंबर को अगली सुनवाई।

झारखंड हाई कोर्ट का सख्त रुख, अब 9 दिसंबर को अगली सुनवाई।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर 8 हजार का हर्जाना लगाया।

  2. ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट प्राथमिकी का मामला।

  3. हेमंत सोरेन द्वारा दर्ज कराई गई थी यह एफआईआर।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी- एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद करने के मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर आठ हजार का हर्जाना लगाया।

अदालत ने हर्जाने की राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार( झालसा) के पास जमा करने का निर्देश दिया है। पिछली सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने प्रतिवादी हेमंत सोरेन पर दस रुपये का हर्जाना लगाया था। मामले में अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी। ईडी की ओर से एएसआजीई एसबी राजू, वरीय अधिवक्ता एके दास और सौरव कुमार ने पक्ष रखा।

यह याचिका ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा समेत अन्य की ओर से दाखिल की गई है। इसमें हेमंत सोरेन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद करने का आग्रह हाई कोर्ट से किया गया है। हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी के अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने को कहा था। इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित उनके आवास पर बिना पूर्व सूचना के छापेमारी की गई।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया। साथ ही केंद्रीय एजेंसी पर मीडिया के माध्यम से भ्रामक सूचनाएं फैलाकर उनकी छवि खराब करने का भी आरोप लगाया गया था।

ईडी अधिकारियों ने प्राथमिकी को निराधार बताते हुए इसे रद करने को याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया था। 

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