झारखंड में लापता बच्चों पर हाई कोर्ट सख्त: बोकारो केस में CBI को बनाया प्रतिवादी, रामगढ़ मामले में पुलिस को झटका
Jharkhand High Court ने लापता नाबालिग के मामले में सीबीआई को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है, बोकारो की किशोरी ...और पढ़ें

हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन: CID जांच के बीच CBI की एंट्री, 7 महीने से गायब मासूमों की मां की याचिका स्वीकार।
HighLights
बोकारो की लापता नाबालिग मामले में सीबीआई को प्रतिवादी बनाया।
रामगढ़ के दो बच्चों की गुमशुदगी पर पुलिस कार्यशैली पर सवाल।
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ओपन जेलों पर रिपोर्ट मांगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में बच्चों के लापता होने के दो अलग-अलग गंभीर मामलों पर तल्ख रुख अपनाया है। बोकारो की चार साल से लापता किशोरी के मामले में अदालत ने सीबीआई को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है।
वहीं रामगढ़ में पिछले सात महीने से गायब दो मासूम बच्चों की सलामती के लिए उनकी मां द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
लापता नाबालिग के मामले में सीबीआई को प्रतिवादी बनाया
हाई कोर्ट में बोकारो जिले की वर्ष 2020 से लापता 14 वर्षीय किशोरी के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में सीबीआइ को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में किसी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो तो राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएं।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान सीआइडी की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार के गोपालगंज की एक लड़की का चेहरा बोकारो की लापता बच्ची से करीब 90 प्रतिशत तक मेल खाता है।
हालांकि, इसकी वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के जरिए शत-प्रतिशत पुष्टि किया जाना आवश्यक है। गौरतलब है कि बोकारो की यह किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। इस संबंध में पिंडराजोरा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट में मामले को अपहरण का मामला माना गया है। घटना स्थल के पास से बच्ची की साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं। फिलहाल मामले की जांच सीआईडी कर रही है।
रामगढ़ के लापता दो बच्चों की मां ने दाखिल की याचिका
रामगढ़ जिले के दो बच्चों के पिछले सात महीने से लापता होने के मामले में उनकी मां ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। बच्चों की सलामती की गुहार लगाते हुए दायर हेबियस कार्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पहले इसे पारिवारिक विवाद मानते हुए कस्टडी संबंधी याचिका दायर करने का सुझाव दिया, लेकिन बच्चों के लंबे समय से लापता होने और पुलिस की कथित निष्क्रियता का पक्ष सामने आने पर अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली।
प्रार्थी बच्चों की मां ने अदालत को बताया कि उनके दोनों बच्चे (एक सात वर्ष, दूसरा पांच वर्ष) तीन दिसंबर 2025 से लापता हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के पिता के साथ लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है और दोनों अलग-अलग रह रहे हैं।
पिता ने दूसरी शादी भी कर ली है, पिछले सात महीने से बच्चों का कोई पता नहीं चल सका है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता आलोक कुमार वर्मा ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल वैवाहिक विवाद का नहीं, बल्कि दो मासूम बच्चों की सुरक्षा और सलामती से जुड़ा है।
उन्होंने आशंका जताई कि बच्चों के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है, इसलिए अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है। अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा जिला पुलिस अधीक्षक से भी बच्चों की तलाश की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रार्थी का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
कोर्ट ने ओपन जेल की व्यवस्था के मामले में सरकार से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने झारखंड में संचालित ओपन जेल की व्यवस्था, कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और उनकी निगरानी को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े इस स्वत: संज्ञान मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सरकार को 20 जुलाई तक प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ओपन जेलों की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय निगरानी कमेटी का गठन कर दिया गया है।
इस पर अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि 20 जुलाई तक कमेटी के गठन के बाद अब तक की गई कार्रवाई, ओपन जेलों में उपलब्ध सुविधाओं और सुधार संबंधी प्रयासों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। इससे पहले हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर तीन सदस्यीय निगरानी कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था।
साथ ही 24 जून तक अनुपालन रिपोर्ट और झारखंड के सभी ओपन जेलों की स्थिति, प्रबंधन, कार्यप्रणाली तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि गृह विभाग के स्तर पर एक निगरानी कमेटी गठित कर ओपन जेलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
कमेटी को ओपन जेलों में चिकित्सा, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने हैं। इसी आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है।
