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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

झारखंड हाई कोर्ट की हेमंत सरकार को सख्‍त चेतावनी... अदालतों की हालत शर्मनाक, जजों को वापस बुला लेंगे...

By Alok ShahiEdited By:
Published: Wed, 16 Mar 2022 07:42 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 16 Mar 2022 07:43 AM (GMT+05:30)

Jharkhand High Court झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि राज्‍य में न्यायपालिका भवनों की वर्तमान हालात शर्मनाक हैं। न्यायिक ...और पढ़ें

Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि राज्‍य में न्यायपालिका भवनों की वर्तमान हालात शर्मनाक है।
Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि राज्‍य में न्यायपालिका भवनों की वर्तमान हालात शर्मनाक है।

रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand High Court झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में राज्य की अदालतों के हालात को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने गिरिडीह उपायुक्त को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब कोर्ट को दूसरे भवन में शिफ्ट करने का आदेश दिया था तो आपने किस अधिकार से कमेटी का गठन किया है। उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गयk।

उपायुक्त की ओर से कोर्ट शिफ्ट करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। अदालत ने इस मामले में सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगी है। सरकार से पूछा है कि किस भवन में कोर्ट को शिफ्ट किया जा रहा है। मामले में अगली सुनवाई आठ अप्रैल को सुनवाई होगी। इस दौरान अदालत में भवन निर्माण सचिव, राजस्व सचिव और गिरिडीह के उपायुक्त कोर्ट में हाजिर हुए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि सरकार गिरिडीह जिले में न्यायिक पदाधिकारियों को बैठने, काम करने लायक माहौल और सुरक्षित भवन नहीं दे सकती है, तो हमें अपने न्यायिक पदाधिकारियों को वापस बुलाना होगा। न्यायपालिका भवनों के वर्तमान हालात शर्मनाक हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा कि गिरिडीह जिला न्यायालय उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया है। भवन जर्जर हालत में है। छत से प्लास्टर गिर रहा है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अदालत ने भवन निर्माण सचिव को स्वयं गिरिडीह जाकर भवन की जांच करने का निर्देश दिया है। जब तक गिरिडीह कोर्ट का नया भवन नहीं बन जाता है, तब तक अस्थाई रूप से न्यायालय को पुराने समाहरणालय में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाए। भवन निर्माण सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि नए कोर्ट भवन का डीपीआर लगभग तैयार है। अदालत ने कहा कि नए भवन निर्माण के लिए चिह्नित जगह सही नहीं है। समाहरणालय के आस-पास जमीन पर कोर्ट भवन बनाने पर विचार किया जाए।

राज्य के कोर्ट भवनों की स्थिति ठीक नहीं

चीफ जस्टिस डा रवि रंजन ने कहा कि राज्य के कई न्यायपालिका के ऐसे भवन है। जहां पर आठ सालों से रंग-रोगन नहीं किया गया है। कोडरमा में कोर्ट भवन की हालत अच्छी नहीं है। चांडिल के अनुमंडलीय अदालत में न तो जेल है और न ही हाजत बना है। भवन सचिव ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में न्यायपालिका भवनों के मरम्मत के लिए 23 योजनाओं को स्वीकृत किया गया है। इसके लिए कुल 40 करोड़ खर्च किया जाना है। अगर बजट में कमी होगी तो भी सरकार इसके लिए तैयार है।