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हेमंत सरकार ने छात्रों की मांगों को माना, विवादित परीक्षाओं को किया रद; CBI जांच से फिलहाल इनकार

Published: Tue, 18 Aug 2026 01:03 AM (IST)

झारखंड सरकार ने छात्रों की मांगों को मानते हुए जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य परीक्षाओं को रद कर दिया है। मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।

HighLights

  1. जेपीएससी, जेएसएससी सहित कई परीक्षाएं रद्द की गईं।

  2. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुधार समिति गठित करने की घोषणा की।

  3. छात्रों की मांगों को मानते हुए सरकार ने बड़ा निर्णय लिया।

राज्य ब्यूरो, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार की देर रात जेपीएससी एवं जेएसएससी की परीक्षाओं में धांधली को लेकर आंदोलनरत छात्रों की तमाम मांगों को मानने की घोषणा कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय से जहां एक ओर छात्रों में खुशी का माहौल है वहीं सैकड़ों की संख्या में नौकरी कर रहे सफल अभ्यर्थी अचानक ही बेरोजगार हो गए हैं।

इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित हो गया है कि इस मामले की सीबीआई जांच फिलहाल नहीं कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की नेतृत्व में रिफॉर्म्स कमेटी के गठन की भी घोषणा की है।

आंदोलनरत छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार रिफॉर्म में पारदर्शिता के साथ काम करेगी। परीक्षा कैसे होनी चाहिए इसका पहले से ही एसओपी बना हुआ है। अगर एसओपी का पालन होता तो ये गड़बड़ियां नहीं होती। उस रिफॉर्म में कुछ और बेहतर चीजें जोड़ी जाएंगी।

रिफॉर्म के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज कैबिनेट ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को भी रद करने का निर्णय लिया है। 2014 से जितनी भी छोटी बड़ी गलतियां हुई हैं सभी की जांच होगी।

दूसरी ओर, झारखंड में जारी प्रदर्शन के बीच सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारी छात्रों की परीक्षा रद करने की मांग मानने के बाद छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, "अभी सीबीआई जांच की मांग नहीं मानी गई है और जब तक हम लोग आंदोलन करते रहेंगे। हम लोग एक बड़ी लड़ाई जीते हैं मगर इसमें अभी और भी कुछ बाकी है... हम मुख्यमंत्री का धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने 24 दिन बाद हमारी मांग सुनी।

जेएसएससी सीजीएल और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के रद होने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "हमारे सिस्टम में जो गड़बड़ी थी और जो धांधली हुई थी, उस पर कार्रवाई हुई है और जिस मकसद से हम लोग संघर्ष कर रहे थे, जान को जोखिम में डालकर आंदोलन कर रहे थे और हमारी मांगों को पूरा किया गया है मगर इसमें खुशी की बात नहीं है क्योंकि अभी बहुत लड़ाई बाकी है... हम सरकार को भी धन्यवाद करते हैं... अभी पूरे शिक्षा प्रणाली को सुधारने को लेकर हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"

कैबिनेट की विशेष बेठक में हम लोगों ने निर्णय लिया है कि टीडीपीएल की ओर से ली गई तमाम परीक्षाओं को रद करने का निर्णय लिया है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम ही सही हैं और कभी लगता है छात्रों की बात सही है। इस दौरान सीआइड और एसआइटी जांच के क्रम में कई ऐसी बातें सामने आई हैं जिसके बाद हम लोगों ने निर्णय लिया है कि टीडीपीएल के द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं और परिणाम को रद करने का निर्णय लिया गया है। - हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि छात्र हित में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब तक छात्रों के भविष्य के साथ पूर्व की सरकारों ने प्रतियोगी परीक्षा के नाम पर सिर्फ छलने और ठगने का काम किया था, लेकिन वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर देश के सामने एक उदाहरण पेश किया है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का झारखंड में आंदोलनरत छात्रों को समर्थन और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय का सुखद परिणाम सामने आया है। ना सिर्फ JPSC 14 , बैकलॉग 2023 - 2025, जेसएससी - सीजीएल और टीडीपीएल के द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं को रद किया गया है, बल्कि साल 2014 से अब तक हुई नियुक्ति प्रक्रिया की सरकार जांच भी कराने जा रही है। ये फैसला राज्य के छात्र - युवाओं के भविष्य के प्रति गठबंधन वाली सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि हमारे बच्चे कई दिनों से अपने हक और भविष्य की चिंता को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उनकी पीड़ा और  उनकी भावनाओं को देखते हुए लोकप्रिय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक कदम पीछे हटने का निर्णय लिया है। लगभग छह घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से स्वीकार करते हुए परीक्षाओं को रद करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार का एक कदम पीछे हटना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने बच्चों की आवाज सुनने, उनकी पीड़ा समझने और उनके भविष्य को प्राथमिकता देने की ताकत है। हमारी सरकार के लिए सत्ता से ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे छात्र-युवाओं का भविष्य है। पूरे मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाया।

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