रांची, राज्य ब्यूरो। चतरा जिले के  प्रतापपुर पंचायत में मनरेगा के तहत  निर्मित 40 सड़कों का कुछ अता-पता नहीं है। दरअसल कागज पर इन सड़कों का निर्माण दिखाकर करोड़ों की रकम गटक ली गई है। पीएमओ से शिकायत के बावजूद स्थानीय प्रशासन इसे टालता रहा। दैनिक जागरण ने 12 अक्टूबर को खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य सचिव कार्यालय ने संज्ञान लिया। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग ने अब इसकी जांच के लिए समिति गठित कर दी है। ग्रामीण विकास विभाग के अपर मनरेगा आयुक्त, अवर सचिव तथा दो सहायक अभियंताओं वाली समिति 29 अक्टूबर को संबंधित क्षेत्र का भ्रमण कर इसकी पड़ताल करेगी।

बताते चलें कि चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड की प्रतापपुर पंचायत में मनरेगा के तहत तथाकथित तौर पर 40 सड़कों का निर्माण हुआ था। इन सड़कों के लिए स्वीकृत पूरी राशि भी निकाल ली गई। सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियों का दावा था कि इनमें से 32 सड़कें वन भूमि पर बनाई गई है, जबकि उत्तरी वन प्रमंडल ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी जमीन पर मनरेगा की एक भी सड़क नहीं बनी है।

ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत की तो स्थानीय प्रशासन ने टालमटोल की नीति अपना ली। अंतत: क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से की। जब इस मामले को लेकर पीएमओ ने जांच का आदेश दिया तो स्थानीय प्रशासन की भी नींद खुली। इसके बावजूद मामला डेढ़ वर्षों से लंबित पड़ा रहा। अब मुख्य सचिव कार्यालय ने इस पर संज्ञान लिया है। माना जा रहा है कि सड़क घोटाले में संलिप्त कई चेहरे सामने आएंगे। साथ ही बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा।

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