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झारखंड में एफपीओ निदेशक या सदस्य होने पर भी किसानों के नाम राशन कार्ड से नहीं कटेंगे, सरकार का निर्देश

Published: Fri, 16 Oct 2026 05:09 PM (GMT+05:30)

झारखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के निदेशकों के राशन कार्ड रद्द किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। ...और पढ़ें

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश के बाद भी जारी है नाम काटना।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश के बाद भी जारी है नाम काटना।

HighLights

  1. एफपीओ निदेशकों के राशन कार्ड रद्द होने पर विवाद।

  2. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने नाम न काटने के निर्देश दिए।

  3. झारखंड कृषि सचिव ने उपायुक्तों को पत्र लिखा।

मनोज सिंह, रांची। झारखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के निदेशकों के राशन कार्ड रद किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के स्पष्ट निर्देश जारी करने के बाद भी राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से एफपीओ निदेशकों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

कृषि विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी किसान का राशन कार्ड या अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल इसलिए रद नहीं किया जा सकता क्योंकि वह किसी एफपीओ में निदेशक या बोर्ड सदस्य के पद पर कार्यरत है।

कृषि सचिव अबुबक्कर सिद्दीख ने राज्य के सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर इस संबंध में तत्काल आवश्यक कदम उठाने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। पत्र में कहा गया है कि उपायुक्त संबंधित पदाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी करें, ताकि एफपीओ के निदेशकों का नाम राशन कार्ड सूची से न काटा जाए।

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली डेटाबेस में गड़बड़ियों की पहचान के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है।  इस प्रक्रिया में एफपीओ के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के रूप में कार्यरत किसानों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे कई किसान निदेशक अपने राशन कार्ड के समाप्त होने की आशंका में एफपीओ से इस्तीफा दे रहे हैं।

एफपीओ को भूमिका और विभाग का पक्ष

सरकार ने स्पष्ट किया है कि एफपीओ का गठन छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करने, उन्हें उन्नत कृषि तकनीक, खाद-बीज और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाता है। इन संगठनों के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में ज्यादातर स्थानीय, छोटे और सीमांत किसान ही होते हैं, जो सीधे खेती-किसानी से जुड़े हैं और किसी व्यावसायिक निजी लाभ के लिए काम नहीं करते।

कृषि सचिव ने जोर देकर कहा है कि एफपीओ में निदेशक होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति खाद्य सुरक्षा योजनाओं की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करता।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा की पात्रता की जांच वास्तविक नियमों और मानकों के आधार पर ही की जाए, न कि केवल कंपनी डायरेक्टर के टैग को देखकर। छोटे एवं सीमांत किसानों के वैध अधिकारों की रक्षा करते हुए ही सत्यापन और डेटा शुद्धीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।

झारखंड में 550 एफपीओ, कई ने पद से इस्तीफा देने की बात कही

झारखंड में 550 एफपीओ हैं, जिनमें से कुछ कंपनी एक्ट और तो कुछ कारपोरेट एक्ट में पंजीकृत हैं। इसमें काम करने वाले निदेशकों का नाम राशन कार्ड सूची से हटाया जा रहा है। जिसके बाद कई ने अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है।

करीब एक दर्जन एफपीओ ने शिकायत कृषि विभाग से की है और खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव से इस संबंध में बातचीत की है। बता दें कि बोकारो जिले के जरीडीह और कसमार प्रखंडों में स्थित एफपीओ के निदेशकों के राशन कार्ड से नाम निदेशक होने के आधार पर हटा दिए गए हैं। इसी तरह जरीडीह तेजस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशकों का नाम भी राशन कार्ड से हटाया दिया गया है।

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