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बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म मामला: 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड, हाई कोर्ट की निगरानी में होगा वतन वापसी का फैसला

Published: Thu, 15 Oct 2026 09:20 PM (IST)

हाई कोर्ट ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में कथित दुष्कर्म के बाद जेल आइजी को सभी डिटेंशन सेंटर और महिला सुधार ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने बुनियादी सुविधाओं पर जेल आइजी से मांगी रिपोर्ट।

हाई कोर्ट ने बुनियादी सुविधाओं पर जेल आइजी से मांगी रिपोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जेल आइजी को जांच का आदेश दिया।

  2. हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में दुष्कर्म का मामला।

  3. बुनियादी सुविधाओं और महिला सुधार गृहों की जांच होगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की अदालत में हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंदी बांग्लादेश की महिला से कथित दुष्कर्म और अवैध हिरासत के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने जेल आईजी को राज्य के सभी डिटेंशन सेंटर और महिला सुधार गृह की जांच करने का आदेश दिया है।

अदालत ने कहा कि जांच कर यह बताया जाए कि राज्य के डिटेंशन सेंटरों और महिला सुधार गृहों की क्या स्थिति है। वहां किसी बुनियादी सुविधा का अभाव तो नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार को बांग्लादेशी दूतावास से महिला की पहचान का सत्यापन करने का निर्देश दिया है।

मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि उक्त महिला को नामकुम स्थित महिला सुधार गृह भेजा जा रहा है। इस संबंध में प्रार्थी अपूर्व विवेक की ओर से याचिका दाखिल की गई है।

याचिका में पीड़िता को अदालत के सामने पेश करने, हजारीबाग डिटेंशन सेंटर से तत्काल रिहा करने, कस्टडी दुष्कर्म की स्वतंत्र जांच और अवैध हिरासत के लिए मुआवजे की मांग की गई थी।

पिछली सुनवाई के दौरान डालसा, हजारीबाग ने जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में पीड़िता से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। सरकार ने अदालत को बताया कि इसमें शामिल रंजीत महतो सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

कोर्ट ने कहा- महिला की गरिमा के साथ जीवन यापन की जिम्मेदारी राज्य की

अदालत ने पाया कि पीड़िता डिटेंशन सेंटर में रहते हुए खुद खाना बनाने को मजबूर है। अदालत ने हैरानी जताई कि डिटेंशन सेंटर प्रशासन ने ऐसी स्थिति कैसे बनने दी। सरकार ने आश्वासन दिया था कि डिटेंशन सेंटर मैनुअल के अनुरूप व्यवस्था की जाएगी और पीड़िता को खाना बनाने जैसी परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।

अदालत ने कहा कि जब तक राज्य पीड़िता को डिटेंशन सेंटर में रखे हुए है, उसकी गरिमा के साथ जीवन यापन की जिम्मेदारी राज्य की है। इससे पहले अदालत ने हजारीबाग के एसपी को निर्देश दिया था कि वे डिटेंशन सेंटर का निरीक्षण कर पानी, बिजली, शौचालय/स्नानघर और नियमित स्वच्छ भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सुरक्षा के लिए तीन महिला और तीन पुरुष की तैनाती की जाए। अदालत ने कहा कि महिला कांस्टेबल की चौबीसों घंटे ड्यूटी सुनिश्चित की जाए।

अदालत की अनुमति से लिया जाएगा महिला के डिपोर्ट पर निर्णय

पीड़िता को उसके बांग्लादेश भेजने के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने 28 जनवरी 2023 को केंद्र सरकार से संपर्क किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला उसके संज्ञान में है, इसलिए डिपोर्ट पर कोई भी निर्णय अदालत की अनुमति से ही लिया जाएगा।