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'केंद्र की नीतियों से झारखंड को ₹22,000 करोड़ का नुकसान', SLBC की बैठक में बोले वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर

Published: Fri, 28 Aug 2026 09:00 AM (IST)

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने SLBC बैठक में दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों से झारखंड को ₹22,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर (फाइल फोटो)

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर (फाइल फोटो)

HighLights

  1. केंद्र की नीतियों से झारखंड को ₹22,000 करोड़ का नुकसान।

  2. GST, मनरेगा, MMDR एक्ट में बदलाव मुख्य कारण।

  3. SLBC बैठक में वित्त मंत्री ने बैंकरों से सहयोग मांगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने गुरुवार को स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इससे झारखंड को करीब 22 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी स्लैब में बदलाव से राज्य को पहले ही करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। 

वहीं, मनरेगा का नाम बदलकर केंद्र की हिस्सेदारी को 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया। इससे झारखंड को करीब चार हजार करोड़ का नुकसान होगा। 

14,000 करोड़ रुपये का नुकसान

वित्त मंत्री ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट में संशोधन के कारण झारखंड को करीब 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे गुरुवार को बरियातू स्थित होटल रामाडा में राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 96वीं त्रैमासिक बैठक में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

बैठक में उन्होंने राज्य के विकास के लिए बैंकरों से सहयोग का आह्वान किया। बताया कि झारखंड का सीडी अनुपात 50.22 प्रतिशत से बढ़कर 54.97 प्रतिशत हो गया है। इसे राज्य के आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन के लिए सकारात्मक संकेत बताया। 

राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय 1.16 लाख रुपये

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद 25 वर्षों में राज्य अपने सभी उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका है। राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय 1.16 लाख रुपये है, जबकि पलामू, गुमला, लातेहार, लोहरदगा और चाईबासा जैसे जिलों में यह 52 से 60 हजार रुपये है। 

एसएलबीसी के संयोजक गुरु प्रसाद गोंड ने बताया कि जून 2026 तक राज्य की कुल जमा राशि 4,04,979 करोड़ रुपये और कुल ऋण 1,82,282 करोड़ रुपये रहा। सकल एनपीए घटकर 4.30 प्रतिशत हो गया है। बैठक में कृषि, एमएसएमई, केसीसी, डिजिटल रिकवरी और री-केवाईसी पर भी जोर दिया गया।

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