रांची, राज्य ब्यूरो। रांची के अपर न्यायायुक्त दिनेश राय की अदालत ने दहेज हत्या के मामले के दोषी करार पूर्व एडीएम अहमद हुसैन एवं उनके बेटे अंदलीब अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की राशि नहीं देने पिता-पुत्र को अतिरिक्त एक-एक साल जेल काटनी होगी।

अदालत ने दोनों को आठ अगस्त को दोषी ठहराया था। अभियुक्तों पर दहेज के लिए शाइस्ता हसमत नामक महिला की हत्या करने का आरोप है। महिला का देवर अंदलीब अहमद पहले से ही जेल में है। सजा पर सुनवाई के दौरान उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई।

इस मामले में घटना के बाद पुत्री का शव देने से इन्कार करने पर पिता हसमत अली ओला की भी मौत हो गई थी। इसके पूर्व महिला के पिता ने ही डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। जिसमें कहा गया था कि डोरंडा के रहमत कालोनी निवासी एडीएम के पुत्र आफताब अहमद के साथ शाइस्ता हसमत की 27 दिसंबर 2015 को शादी हुई थी।

दहेज के रूप में एक फ्लैट खरीदने के लिए 15 लाख की मांग को लेकर शाइस्ता को प्रताड़ित किया जाता था। जब दहेज नहीं दिया गया तो 12 जुलाई 2017 को सास, ससुर व देवर ने बिजली की तार से गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी थी।

पूजा सिंघल व सुमन कुमार की जमानत पर 23 को सुनवाई

ईडी की विशेष अदालत में मनी लाउंड्रिंग के आरोपित निलंबित आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल के सहयोगी सीए सुमन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई।

अदालत ने ईडी के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। सुमन कुमार की ओर से पांच अगस्त को याचिका दाखिल कर जमानत देने की गुहार लगाई गई है। इस पर मनरेगा घोटाले की राशि से मनी लांड्रिंग करने में साथ देने का आरोप है।

सुमन कुमार को ईडी ने 7 मई को गिरफ्तार किया था। ईडी की तलाशी के दौरान उसके आवास से 17. 49 करोड़ एवं उसके कार्यालय परिसर से 29.70 लाख रुपये की राशि बरामद की गई थी। सुमन कुमार गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में है। बता दें कि इसी मामले में पूजा सिंघल की जमानत याचिका को ईडी कोर्ट ने पूर्व में खारिज कर दी थी।

सहायक प्रोफेसर नियुक्ति मामले में जेपीएससी से मांगा जवाब

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस डा. एसएन पाठक की अदालत में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने जेपीएससी से जवाब मांगा है। अदालत ने जेपीएससी से पूछा है कि जब अभ्यर्थियों से आपत्ति मांगी गई थी तो बिना उनके निवारण के नियुक्ति की अनुशंसा क्यों की गई। मामले में अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के अंतिम आदेश से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी। इस संबंध में गौतम राज सिंह मुंडा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता शुभाशीष रसिक सोरेन ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में जेपीएससी ने मुंडारी विषय के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। बाद में उसे रोक दिया गया। फरवरी 2022 में फिर से नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ की गई।

जेपीएससी ने नौ जून को परिणाम जारी कर अभ्यर्थियों से 12 जून तक आपत्ति मांगी थी। आपत्तियों पर बिना विचार किए ही जेपीएससी ने साक्षात्कार शुरू कर दिया और 29 जून को 18 अभ्यर्थियों की रांची यूनिवर्सिटी में नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गई। इस पर अदालत ने जेपीएससी से जवाब मांगा है।

Edited By: M Ekhlaque