यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आई अब बाबूलाल की बारी... कहा, हेमंत सोरेन के पाप का घड़ा तो फूटेगा ही... कपिल सिब्बल को भी लपेटा
Jharkhand News झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा अपने नाम पर खदान लीज लेने पर ...और पढ़ें

रांची, जेएनएन। Jharkhand News झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी फिर से हेमंत सोरेन पर हमलावर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा अपने नाम पर खदान लीज लेने के मामले में खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि कानूनी दांव-पेंच में थोड़ा वक्त जरूर मिल सकता है, पर पाप का घड़ा तो फूटेगा ही। बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को टैग करते हुए लिखा- आदरणीय कपिल सिब्बल जी, बताया गया है कि वकील भी वकालत के अलावा दूसरा व्यापार नहीं कर सकता। फिर पत्थर खदान लेने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तो आप बताए होंगे कि ऐसा अपराध क्षमा योग्य नहीं है।
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बाबूलाल ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि कानूनी दांव-पेंच में थोड़ा वक्त जरूर मिल सकता है, पर पाप का घड़ा तो फूटेगा ही न। बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन के खान पट्टा मामले पर सीधी और सधी हुई टिप्पणी करते हुए कहा है कि मुख्यमंंत्री होते हुए किसी तरह का धंधा-व्यापार नियम विरुद्ध है। झारखंड हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी दांव-पेच से फौरी राहत संभव है, लेकिन आखिरकार उन्हें जाना ही होगा।
आदरणीय @KapilSibal जी, बताया गया है कि वकील भी वकालत के अलावा दूसरा व्यापार नहीं कर सकता। फिर पत्थर खदान लेने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तो आप बताये होंगे कि ऐसा अपराध क्षमा योग्य नहीं है।
क़ानूनी दांव-पेंच में थोड़ा वक्त ज़रूर मिल सकता है, पर पाप का घड़ा तो फूटेगा ही न।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 24, 2022
बता दें कि कपिल सिब्बल झारखंड सरकार के वकील हैं। वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का झारखंड उच्च न्यायालय में दाखिल दो याचिकाओं में बचाव कर रहे हैं। ये याचिकाएं प्रार्थी शिवशंकर शर्मा की ओर से दाखिल की गई है। जिसमें हेमंत सोरेन के खदान लीज और हेमंत सोरेन एवं उनके करीबियों पर 400 शेल कंपनियों में निवेश करने के मामले में सीबीआइ जांच की मांग की गई है। बाबूलाल का ये ट्वीट ऐसे समय में आया है, जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन की सीबीआइ जांच कराने के मामले की अहम सुनवाई हो रही है।
इससे पहले बीते दिन बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट किया- आज झारखंड सरकार अवैध घुसपैठियों पर अपने लचीले बर्ताव से इनके मनोबल को बढ़ा रही है। हाल के दिनों में पंचायत चुनावों की सभा व जुलूस में पाकिस्तान के समर्थन में नारे और बढ़ती हुई साम्प्रदायिक घटनाओं पर पुलिस प्रशासन ने भी स्वीकार किया था कि राज्य में स्लीपर सेल सक्रिय हैं। सरकार ने हजारीबाग में डिटेंशन सेंटर बनाने की बात कही थी, आज उसपर क्या प्रगति हुई? सरकार को इसे बताना चाहिए। भाजपा मांग करती है कि पहले चरण में संताल परगना में सर्वे कर घुसपैठियों को चिह्नित किया जाए। नहीं तो आने वाले दिनों में परिसीमन होंगे तो जनजाति आरक्षित सीटें समाप्त हो जाएगी।
आज झारखंड सरकार अवैध घुसपैठियों पर अपने लचीले बर्ताव से इनके मनोबल को बढ़ा रही है।
हाल के दिनों में पंचायत चुनावों की सभा व जुलूस में पाकिस्तान के समर्थन में नारे और बढ़ती हुई साम्प्रदायिक घटनाओं पर पुलिस प्रशासन ने भी स्वीकार किया था कि राज्य में स्लीपर सेल सक्रिय हैं।
सरकार ने pic.twitter.com/0YzxWAxJuX
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 23, 2022
सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया, राज्य की जेलों में चार विदेशी हैं बंद
झारखंड में घुसपैठ रोकने व विदेशी नागरिक के पकड़े जाने के मामले में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर पूरे मामले की जानकारी दी है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि राज्य की जेलों में चार विदेशी नागरिक बंद हैं। इनमें हजारीबाग स्थित जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में एक विदेशी महिला बंद है। वहीं, मंडल कारा धनबाद में दो व रामगढ़ में एक विदेशी नागरिक बंद हैं। सरकार ने बताया है कि जैसे ही किसी संदिग्ध की सूचना मिलती है, झारखंड पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है।
हलफनामा में सरकार ने बताया है कि विदेशी नागरिकों के मामले में अब भी सभी जिलों में पुलिस जागरूक नहीं है। सभी जिलों के एसपी फारेन रीजनल रजिस्ट्रेशन आफिसर (एफआरआरओ) होते हैं, जिन्हें विदेशी नागरिकों के पकड़े जाने के मामले में स्वयं पहल करनी है और उससे संबंधित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना है। पूर्व में रोहिंग्या पकड़े गए थे। जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी। अब नया कोई मामला सामने नहीं आया है।
गाइडलाइंस से जिलों को कराएंगे अवगत
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामा में सरकार ने बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की दो गाइडलाइंस से सभी जिलों को अवगत कराने जा रहे हैं। पहली गाइडलाइन यह है कि जब कोई विदेशी नागरिक पकड़ा जाता है तो तीन पन्ने का एक प्रपत्र भरकर संबंधित दूतावास को और संबंधित देश स्थित भारतीय दूतावास को भेजकर जानकारी दी जाती है और उस देश को बताया जाता है कि उनका नागरिक राज्य में किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया है और जेल भेजा गया है। दूसरी गाइडलाइन यह है कि जब विदेशी नागरिक की सजा खत्म होने को होती है तो उससे तीन महीने पहले संबंधित दूतावास व संबंधित देश के दूतावास को इसकी जानकारी दी जाती है, ताकि वह अपने स्वजन को ले जा सके। इसके लिए अल्पकालिक वीजा बनवाना पड़ता है। हलफनामा में सरकार ने इसे विस्तार से बताया है।
