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झारखंड शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: 15 जिलों के 3,485 स्कूलों में होगी विशेष PTM, देखें अपने जिले की सूची

Published: Sat, 27 Jun 2026 09:52 PM (IST)

झारखंड शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने के लिए 15 जिलों के 3,485 स्कूलों में विशेष अभिभावक-शिक्षक बैठकें आयोजित करने का फैसला किया है। Jharkhand Top News

AI Generated Image.

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HighLights

  1. ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने का अभियान।

  2. 5 से 18 वर्ष के बच्चों का विशेष नामांकन होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों को वापस मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने कमर कस ली है। 
 
विभाग ने राज्य के 15 जिलों में ऐसे 3,485 विद्यालयों की पहचान की है, जहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है या उनके पोषक क्षेत्र में भारी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर हैं। 
 
इन चिह्नित स्कूलों में अब विशेष अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) का आयोजन किया जाएगा। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए त्रैमासिक PTM का विस्तृत कार्यक्रम तय किया है। 
 
इसको लेकर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSEO) को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
 

29 जून से शुरू होगी पहली त्रैमासिक बैठक, यहां देखें पूरा शेड्यूल

राज्य मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान कुल चार त्रैमासिक बैठकें आयोजित की जाएंगी। पहली बैठक की तारीख बेहद नजदीक है: 

  •     प्रथम बैठक: 29 जून से 04 जुलाई 2026
  •     द्वितीय बैठक: 07 से 12 सितंबर 2026
  •     तृतीय बैठक: 07 से 12 दिसंबर 2026
  •     चतुर्थ बैठक: 25 से 30 मार्च 2027

 

टोलों में घूमेंगी टीमें, 5 से 18 वर्ष के बच्चों का होगा विशेष नामांकन 

राज्य परियोजना निदेशक ने इन 3485 विद्यालयों को उच्च प्राथमिकता (High Priority) सूची में रखने का निर्देश दिया है। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
  •     विशेष नामांकन अभियान: चिह्नित स्कूलों के पोषक क्षेत्रों और स्थानीय टोलों में जाकर 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जो किसी भी स्कूल में नामांकित नहीं हैं।
  •     अभिभावकों से संपर्क: शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों की टीम सीधे अभिभावकों के घर जाकर उनसे मुलाकात करेगी और बच्चों का दोबारा स्कूल में दाखिला कराने का अनुरोध करेगी।
  •     उपस्थिति में सुधार: जिन बच्चों का नाम दर्ज है लेकिन वे स्कूल नहीं आ रहे हैं, उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए PTM में माता-पिता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।
 

रोजाना 2 स्कूलों का करना होगा औचक निरीक्षण

इस विशेष अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य परियोजना निदेशक ने मॉनिटरिंग को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं:
  • 30% स्कूलों का रैंडम निरीक्षण: सभी DEO और DSEO को निर्देश दिया गया है कि वे PTM के दौरान अपने जिले के कम से कम 30 प्रतिशत स्कूलों का रैंडम सैंपल के रूप में औचक निरीक्षण करवाएं।
  • अधिकारियों का भौतिक सत्यापन: जिला स्तर के दोनों आला अधिकारी (DEO और DSEO) स्वयं अनिवार्य रूप से प्रतिदिन कम से कम दो विद्यालयों का भ्रमण करेंगे और इस पूरी बैठक की विस्तृत रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को सौंपेंगे।
 

जिलावार सूची: किस जिले में कितने स्कूल किए गए चिह्नित? 

झारखंड के 15 जिलों में से सबसे ज्यादा स्कूल पाकुड़ और दुमका में चिह्नित किए गए हैं। पूरी सूची इस प्रकार है:
 
जिला    चिह्नित विद्यालयों की संख्या    जिला         चिह्नित विद्यालयों की संख्या
  • पाकुड़               609                देवघर        232
  • दुमका               536                खूंटी          205
  • पलामू               428                 गिरिडीह     171
  • गोड्डा                341                 गुमला        157
  • पश्चिमी सिंहभूम     279                 साहिबगंज   154
  • रांची                112                  धनबाद      100
  • लोहरदगा           99                   गढ़वा         40
  • लातेहार             31                   कुल          3,485
 
इस बड़े अभियान के जरिए झारखंड सरकार का लक्ष्य ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारना और हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना है।

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