झारखंड के 9,816 गांवों में इंटरमीडिएट और 7,499 गांवों में हाई स्कूल की पहुंच नहीं; केंद्र से राज्य सरकार को चेतावनी
झारखंड के 7,499 गांवों में माध्यमिक और 9,816 गांवों में इंटरमीडिएट शिक्षा की पहुंच नहीं है, जिस पर केंद्र ने ...और पढ़ें

झारखंड के हजारों गांवों में शिक्षा की कमी, सरकार का बड़ा कदम। (फाइल फोटो: सांकेतिक)
HighLights
7,499 गांवों तक माध्यमिक शिक्षा की पहुंच नहीं।
9,816 गांवों में इंटरमीडिएट शिक्षा से वंचित आबादी।
765 स्कूलों को प्लस टू में अपग्रेड करेगी सरकार।
नीरज अम्बष्ठ, रांची। झारखंड के 7,499 गांवों तक माध्यमिक शिक्षा की पहुंच नहीं हो पाई है। इसी तरह, राज्य के 9,816 गांव इंटरमीडिएट शिक्षा की पहुंच से दूर हैं। हालांकि यह संख्या राज्य के कुल गांवों का क्रमश: 6.15 तथा 8.06 प्रतिशत ही है।
फिर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित मानक के अनुसार, किसी गांव के पांच किमी के दायरे में कम से कम एक हाई स्कूल होना अनिवार्य है।
वहीं, किसी गांव के सात से 10 किमी के दायरे में कम से कम एक प्लस टू उच्च विद्यालय होना चाहिए। लेकिन उक्त संख्या में गांवों में यह सुविधा नहीं पहुंच पाई है।
समग्र शिक्षा अभियान के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की स्वीकृति को लेकर प्रोग्राम एप्रूवल बोर्ड (पैब) की बैठक में इस कमी की ओर राज्य के पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया। कहा गया कि ऐसे स्कूलों की पहचान कर उनतक माध्यमिक और इंटर स्तर की शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित की जाए।
वंचित आबादी को ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन
पैब की बैठक में राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारियों ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर वहां ट्रांसपोर्ट या एस्कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। विद्यालयों के अपग्रेड किए जाने की जानकारी भी दी।
प्लस टू में अपग्रेड होंगे 750 विद्यालय
राज्य सरकार 765 सरकारी स्कूलों को प्लस टू उच्च विद्यालय के रूप में अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। इसपर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की स्वीकृति भी मिल चुकी है। शीघ्र ही इसका प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।
इस प्रस्तावित योजना के तहत 449 हाई स्कूल तथा 316 मिडिल स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। इन विद्यालयों के अपग्रेड करने पर प्रतिवर्ष लगभग 1109 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अपग्रेड करने के लिए उन विद्यालयों का ही चयन किया गया है, जिनके पास न्यूनतम एक एकड़ जमीन उपलब्ध है। माना जा रहा है कि इन विद्यालयों के अपग्रेड होने से कई वंचित गांवों तक माध्यमिक और इंटर स्तरीय शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी।
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