MMDR ने सेस बंद किया, झारखंड में बढ़ा: कैप्टिव खदानों से खनिज व्यापार पर अब दोगुनी रॉयल्टी और सेस का भुगतान
झारखंड सरकार ने कैप्टिव खदानों से खनिज का व्यापार करने पर रॉयल्टी और सेस दोगुना कर दिया है। एमएमडीआर एक्ट ...और पढ़ें

सार्वजनिक उपक्रमों की खदानों को भी देना होगा दोगुना राजस्व।
HighLights
कैप्टिव खदानों से खनिज व्यापार पर दोगुनी रॉयल्टी और सेस का भुगतान।
खनिज सेस 450 रुपये से बढ़कर 900 रुपये प्रति टन हुआ।
एमएमडीआर एक्ट के विरोध में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। एमएमडीआर एक्ट के तहत राज्यों के लिए खनिज का सेस लेने का अधिकार खत्म कर दिया गया है। इस कानून की अधिसूचना प्रभावी होने के बाद भी झारखंड में न सिर्फ खनिजों के सेस की वसूली हो रही है अपितु कुछ मामलों में सेस के साथ रॉयल्टी को भी दोगुना कर दिया गया है। इस मुद्दे पर कैबिनेट में एमएमडीआर एक्ट के विरोध में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट में ही खनिज की राजस्व उगाही के नए नियम कायदे पर मुहर लगी है। इसके तहत कैप्टिव माइंस से खनिज निकाल उसका खुद उपयोग करने के बजाय व्यापार किया जाता है तो दोगुनी रॉयल्टी और सेस का भुगतान करना होगा। जो खदानें खनिज का व्यापार करने के उद्देश्य से ली गई हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा।
झारखंड में पंजाब, बंगाल समेत कई राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमों ने कोयला खदानों की लीज ली है। शर्त है कि वहां से निकाले गए खनिज का खुद उपयोग करेंगे। कुछ सार्वजनिक उपक्रमों का तर्क है कि उनके पास कोयला जैसे खनिज का भंडार किसी कारणवश बढ़ जाता है तो आग लगने का खतरा बन जाता है।
इसलिए, खान व भूतत्व विभाग ने यह व्यवस्था बनाई है कि कैप्टिव माइंस के संचालक खनिज का कारोबार करते हैं तो उन्हें दोगुनी रॉयल्टी एवं सेस का भुगतान करना होगा। इसी शर्त पर उन्हें इसकी अनुमति दी जाएगी।
पंजाब, बंगाल, आंध्र पावर, टाटा स्टील समेत कई कंपनियों की खदान झारखंड में
झारखंड में टाटा स्टील, वेस्ट बंगाल पावर कारपोरेशन, आंध्र प्रदेश पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन, तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड, दामोदर वैली कारपोरेशन समेत कई कंपनियों की कोयला खदान हैं जो खनिज का खुद उपयोग करती है। लौह , बॉक्साइट, तांबा आदि की भी कैप्टिव खदान है।
विशेष परिस्थिति के लिए खान और भूतत्व विभाग ने यह व्यवस्था बनाई है कि कोयला के मूल्य का 14 फीसद रॉयल्टी होती है। प्रति टन 450 रुपये सेस लगता है। खुद उपयोग की जगह दूसरे को बेचने पर रॉयल्टी की राशि दोगुना होगी और सेस भी दोगुना 900 रुपये प्रति टन देना होगा। यह व्यवस्था कोयला समेत किसी भी वृहद खनिज के लिए लागू होगी।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद खान व भूतत्व सचिव अरवा राजकमल ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। खान निदेशक राहुल सिन्हा का अधीनस्थों को निर्देश है कि प्रावधान को कायदे से लागू करें।
25 से विधानसभा सत्र, एमएमडीआर एक्ट पर होगी जोरदार बहस
झारखंड कैबिनेट ने एमएमडीआर एक्ट में संशोधन पर 25 और 26 नवंबर को विशेष सत्र बुलाया है। इसमें एमएमडीआर एक्ट पर पक्ष और विपक्ष में जोरदार बहस होनी तय है। हेमंत सरकार ने सेस वसूली रोकी नहीं है। अब कुछ मामलों में दोगुना कर साफ संदेश दिया है कि वो आर पार को तैयार है।
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