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झारखंड डीजीपी मामला: 1 दिन की सेवा शेष रहने पर नियुक्ति पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

Published: Wed, 07 Oct 2026 09:04 PM (IST)

केंद्र सरकार ने झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ...और पढ़ें

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

HighLights

  1. केंद्र ने झारखंड डीजीपी नियुक्ति पर अवमानना याचिका दायर की।

  2. डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देशों का उल्लंघन।

  3. न्यूनतम छह महीने की सेवा अवधि का नियम तोड़ा गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 
 
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र की इस याचिका को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।
 

सालीसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष रखा मामला 

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया। 
 
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि केंद्र की अवमानना याचिका को डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से संबंधित पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ ही सुनवाई के लिए टैग किया जाए, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।
 

नियुक्ति प्रक्रिया और 6 महीने की सेवा अवधि पर विवाद 

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। मूल विवाद नियुक्ति के समय अधिकारी की बची हुई सेवा अवधि को लेकर है।
 
झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को राज्य का डीजीपी नियुक्त किया था, जबकि वे इसके अगले ही दिन (31 दिसंबर) सेवानिवृत्त होने वाली थीं।
 

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के उल्लंघन का आरोप 

मामले में सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे अमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) और वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अदालत को अवगत कराया था कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट आदेश के विपरीत है।
 
इइसके तहत डीजीपी पद पर नियुक्ति के समय संबंधित आईपीएस अधिकारी की कम से कम छह महीने की सेवा अवधि शेष होनी अनिवार्य है। शीर्ष अदालत आज इस पूरे मामले पर अहम सुनवाई करेगी।