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झारखंड कांग्रेस में गुटबाजी और 'जातीय संतुलन' का संकट, प्रभारी के. राजू के नियंत्रण से बाहर दिख रही पार्टी

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:33 PM (IST)

झारखंड कांग्रेस में अनुशासनहीनता और गुटबाजी बढ़ रही है, जिससे प्रदेश प्रभारी के. राजू का नियंत्रण कमजोर होता दिख रहा है।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू। (सोशल मीडिया)

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू। (सोशल मीडिया)

HighLights

  1. झारखंड कांग्रेस में प्रदेश प्रभारी के. राजू का नियंत्रण कमजोर दिख रहा है।

  2. पार्टी में अनुशासनहीनता पर जातिगत आधार पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।

  3. केएन त्रिपाठी, अभिलाष साहू जैसे नेताओं पर कार्रवाई में असमानता देखी गई।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कांग्रेस में गड़बड़ियां रुक नहीं पा रही हैं और अब कहीं न कहीं ऐसा लगने लगा है कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू के नियंत्रण में पार्टी नहीं है।

पार्टी में हाल की कुछ गतिविधियों से ऐसा दिखने लगा है कि जात-पात और अगड़ा-पिछड़ा की भावनाएं अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रभावित करने लगी हैं।

पार्टी में अब सरेआम यह चर्चा होती है कि फलां अगड़ा था इसलिए कार्रवाई में फंस गया और फलां पिछड़ा होने के कारण बच निकला। हाल के कुछ निर्णय इसकी बानगी प्रस्तुत करते हैं।

त्रिपाठी को अनुशासन की चेतावनी

पूर्व विधायक और मंत्री रह चुके केएन त्रिपाठी को अनुशासन समिति ने कारण बताओ नोटिस देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

त्रिपाठी पर आरोप है कि वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुखर विरोधी रहे हैं और सार्वजनिक ताैर पर उनके निर्णयों की आलोचना करते हैं।

त्रिपाठी ने डीजीपी को अवधि विस्तार देने के निर्णय की खुलेआम भर्त्सना की थी और इस कारण उन्हें पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। त्रिपाठी ने लगभग 80 पन्नों में इसका जवाब भी दिया और अभी तक कार्रवाई से बचे हुए हैं।

अभिलाष और अमरेंद्र के प्रकरण ने अगड़ा-पिछड़ा का रूप धरा

सड़क जाम कर रहे मुसलमानों को सरेआम गाली देने और फेसबुक लाइव पर भाजपा के सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करने में के आरोप में कांग्रेस नेताओं अभिलाष साहू और अमरेंद्र सिंह के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाई की।

इस मामले में जल्द ही अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त कर दिया गया और इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि कार्रवाई से मुक्त होने के बाद साहू पिछड़ा वर्गों के लिए कांग्रेस के प्रदर्शन में अधिक से अधिक भीड़ लेकर पहुंचेंगे।

भीड़ तो जुटी नहीं और अब कहा जा रहा है कि निर्णय गलत हो गया। इस बीच, यह बात भी खुलकर बोली जा रही है कि अभिलाष पिछड़ा वर्ग से आते हैं और यही कारण है कि उन्हें तत्काल राहत प्रदान कर दी गई। दूसरी ओर, अमरेंद्र सिंह अगडे़ समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं जिस कारण से उन्हें माफ नहीं किया जा रहा है।

नवीन मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई

पार्टी के इंटरनेट मीडिया प्रकोष्ठ के नवीन मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर विरोधी टिप्पणियां कीं जिससे कांग्रेस की छवि खराब हुई।

ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार तैयार हुआ और कार्रवाई की भी गई। इस मामले में भी आरोप लग रहे हैं कि चूंकि नवीन मिश्रा अगड़ा वर्ग के हैं इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

अंबा प्रसाद सीएम के खिलाफ बयान देकर भी कार्रवाई से वंचित

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ सरेआम बयान देने के बावजूद कार्रवाई से मुक्त हैं। आरोप लग रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष उन्हें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के इशारे पर बचा रहे हैं।

दूसरी ओर, उनके पिता योगेंद्र साहू अब कार्रवाई के दायरे में आते दिख रहे हैं। योगेंद्र साहू को पहले तीन वर्षों के लिए निलंबित किया गया था लेकिन महज तीन महीने में आरोप मुक्त करते हुए पार्टी में उनकी वापसी हो गई। इस प्रकरण में एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष पर पिछड़ों की मदद का आरोप लग रहा है।

यह भी पढ़ें- झारखंड कांग्रेस में अनुशासन के नाम पर 'खेल': निलंबन और राहत का फैसला बना मुसीबत, गठबंधन में खटास

ऐसी कोई बात नहीं है। पार्टी में कोई भी निर्णय सर्व सम्मति से लिया जाता है। अपना-अपना नजरिया है। कभी किसी को मुक्त करिए तो आरोप लगने लगता है और नहीं करिए तो भी वही बातें होती हैं। कांग्रेस में कहीं कोई विवाद नहीं है।

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केशव महतो कमलेश, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस।