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झारखंड कांग्रेस में अनुशासन के नाम पर 'खेल': निलंबन और राहत का फैसला बना मुसीबत, गठबंधन में खटास

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:29 PM (IST)

झारखंड कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गई है, जहां नेताओं को निलंबित करने के बाद जल्द ही आरोप मुक्त कर दिया जाता है।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।

HighLights

  1. कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल एक दिखावा बनकर रह गई है।

  2. निलंबित नेताओं को जल्द ही आरोप मुक्त कर दिया जाता है, असंगति स्पष्ट।

  3. योगेंद्र साहू का निलंबन तीन महीने में रद्द, अब गठबंधन पर हमलावर।

राज्य ब्यूरो, रांची। प्रदेश कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खेल चल रहा है। कभी पार्टी के अन्य लोगों को खुश करने के लिए तो कभी गठबंधन दलों के आरोपों को सुनते हुए पहले तो नेताओं के ऊपर कार्रवाई की जाती है और महज चंद दिनों में उन्हें आरोप मुक्त कर दिया जाता है।

हास्यास्पद बात यह है कि जिन्हें तीन वर्षों के लिए निलंबित किया गया था उन्हें महज तीन महीने में मुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, कई नेताओं को बिना स्पष्टीकरण लिए ही आरोप मुक्त कर दिया जा रहा है।

इससे पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ताओं और गठबंधन दलों के बीच सही संदेश नहीं जा रहा है। हाल की कुछ घटनाओं को देखकर ऐसा ही लग रहा है।

पिछले दिनों मुसलमानों के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने वाले दो नेताओं अभिलाष साहू और अमरेंद्र सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। दोनों नेताओं को अगले आदेश तक पार्टी से निलंबित किया गया था।

इन्होंने फेसबुक लाइव पर मुसलमानों को भला-बुरा तो कहा ही था, यह भी कहा था कि योगी आदित्यनाथ रहते तो इन्हें ऐसा बोलने की हिम्मत नहीं होती।

दरअसल, दोनों नेता मुसलमानों की ओर से की गई सड़क जाम में फंस गए थे। इस प्रकरण में इनमें से एक अभिलाष साहू का निलंबन महज 15 दिनों के अंदर वापस हो गया जबकि अनुशासन समिति की ओर से उन्हें कम से कम दो महीने के लिए निलंबित किए जाने की बात कही जा रही थी।

इसी मामले में एक ही तरह का आरोप होने के बावजूद अमरेंद्र सिंह का निलंबन वापस नहीं हुआ। अनुशासन समिति उन्हें कम से कम छह महीने के लिए निलंबित रखने की तैयारी में थी। अब दोनों मामलों को लेकर पार्टी नए सिरे से निर्णय लेगी।

योगेंद्र साहू का भी निलंबन वापस

इसी प्रकार अपने बयानों से गठबंधन के लिए मुसीबत पैदा करने वाले पूर्व मंत्री योगेंद्र साहू को तीन वर्षों के लिए निलंबित किया गया था लेकिन तीन महीने में ही उन्हें निलंबन मुक्त कर दिया गया। अब इसका खामियाजा पूरी पार्टी उठा रही है।

योगेंद्र साव पहले से भी अधिक आक्रामक बयान दे रहे हैं और गठबंधन सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सार्वजनिक रूप से भला-बुरा कहना शुरू कर दिया है। स्थिति ऐसी हो गई है कि हजारीबाग जिला के झामुमो नेता कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने का दबाव अपनी पार्टी पर बना रहे हैं।

इस प्रकरण के आगे बढ़ने की संभावनाओं के बीच कांग्रेस ने योगेंद्र साव को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। अब उनके जवाब पर आगे की कार्रवाई होगी।

फिलहाल इस प्रकरण में अनुशासन समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। जो भी हो, कांग्रेस के लिए ऐसे प्रकरण मुसीबत का कारण बन रहे हैं।

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