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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand politics: बहाना बनेंगे विधायक समरी लाल, राजभवन व चुनाव आयोग पर पलटवार की तैयारी

By M EkhlaqueEdited By:
Published: Sun, 21 Aug 2022 02:16 PM (IST)Updated: Sun, 21 Aug 2022 02:20 PM (IST)

Hemant Soren News हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के खिलाफ शिकायत पर तत्परता से कार्रवाई लेकिन समरी लाल की शिकायत ...और पढ़ें

Jharkhand News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और भाजपा विधायक समरी लाल का फाइल फोटो।
Jharkhand News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और भाजपा विधायक समरी लाल का फाइल फोटो।

रांची, {प्रदीप सिंह}। Jharkhand political crisis झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे शह-मात के खेल में कांके के भाजपा विधायक समरी लाल राजभवन और भारत निर्वाचन आयोग पर पलटवार का हथियार बन सकते हैं। समरी लाल पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति के खिलाफ सुरक्षित कांके विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जबकि एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में यह पाया गया कि वे जातिगत आरक्षण के लाभ के दायरे में नहीं आते। राजभवन को विधानसभा की ओर से उनका अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट से निर्वाचन का मामला और जाति प्रमाणपत्र पत्र रद करने संबंधी छानबीन समिति की रिपोर्ट भी भेजी गई थी।

इस संबंध में वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी सुरेश बैठा का आवेदन भी संलग्न था। विधानसभा अध्यक्ष ने समिति के फैसले की जानकारी और संवैधानिक प्रविधानों का भी राज्यपाल को लिखे पत्र में जिक्र किया था। इसके मुताबिक ऐसे मामलाें में संविधान के अनुच्छेद 192 में राज्यपाल काे फैसला लेने का अधिकार प्राप्त है। निर्वाचन आयाेग से विमर्श करने के बाद राज्यपाल इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे।

भाजपा विधायक समरी लाल का जाति प्रमाणपत्र रद

स्पीकर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि संविधान के अनुच्छेद 371ए के खंड (2) के मुताबिक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कांके सीट पर इसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति ही विधायक बन सकते हैं। समरी लाल का जाति प्रमाण पत्र रद हो गया है। इससे उनकी विधायक रहने की योग्यता प्रभावित हुई है।

निर्वाचन आयोग से मांगा गया है मंतव्य, जवाब नहीं

इस मामले में निर्वाचन आयोग से मंतव्य मांगा गया है, लेकिन इसमें कोई प्रगति नहीं है। उधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई विधायक बसंत सोरेन के खिलाफ इसी अवधि में दो अलग-अलग शिकायतों पर राजभवन और निर्वाचन आयोग ने पूरी तत्परता दिखाई। इन मामलों में बहस पूरी हो चुकी है और फैसले का इंतजार किया जा रहा है। इसे देखते हुए सत्ता पक्ष समरी लाल के बहाने राजभवन और निर्वाचन आयोग पर पलटवार की तैयारी में है।

झामुमो और कांग्रेस ने सौंपा था राज्यपाल को ज्ञापन

समरी लाल की सदस्यता रद करने की मांग को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर शिकायत की थी। प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया था कि समरी लाल का जाति प्रमाणपत्र जाति छानबीन समिति ने रद कर दिया है, लिहाजा उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जाए। फिलहाल इसपर निर्वाचन आयोग का मंतव्य अपेक्षित है।

कांग्रेस का सवाल, आखिर इतनी तत्परता क्यों

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर के मुताबिक हेमंत सोरेन के खिलाफ पत्थर खनन लीज मामले में भाजपा की शिकायत पर राजभवन और निर्वाचन आयोग की हड़बड़ी समझ में नहीं आती। खनन लीज सरेंडर भी हो चुका है। निर्वाचन आयोग ने विशेष दूत भेजकर उस वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय को नोटिस थमाया, जब वे अपनी बीमार मां के सिलसिले में राज्य के बाहर थे। भाजपा के कई नेता बार-बार इस मामले को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे है, जिससे लगता है कि सबकुछ पूर्व नियोजित है। संवैधानिक संस्थाओं को इससे बचना चाहिए। कांके से भाजपा के विधायक समरी लाल पर अत्यंत गंभीर प्रकृति का आरोप है। उनके जाति प्रमाणपत्र को विभागीय समिति ने रद कर दिया है, लेकिन उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में यह लगता है कि षड्यंत्र हो रहा है। संवैधानिक संस्थाओं को इसका ख्याल रखना चाहिए। एक आधारहीन और बेबुनियाद मामले में अत्यधिक हड़बड़ी और सत्य साबित हो चुके मामले में शिथिलता बरतना घातक है।