रांची, राज्य ब्यूरो। बाबूलाल मरांडी भाजपा विधायक दल के नेता चुन लिए गए और पार्टी ने इस आशय की लिखित सूचना विधानसभा को दे भी दी, लेकिन बाबूलाल मरांडी को बतौर भाजपा विधायक मान्यता मिलेगी या नहीं यह विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो को तय करना है। सीधे शब्दों में समझें भाजपा के स्तर से पत्र सौंपे जाने के बावजूद भी नेता प्रतिपक्ष को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। सिर्फ बाबूलाल ही नहीं प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के मामले में भी स्पीकर को निर्णय लेना है। इधर, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा है कि दोनों पक्षों के दावे का अध्ययन कर विधानसभा सचिवालय उचित निर्णय लेगा। जो भी फैसला होगा, विधि-सम्मत होगा। उधर कांग्रेस में शामिल होने वाले प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने सत्ता बेंच पर बैठने की अर्जी विधानसभा सचिवालय को दी है।

कुछ ऐसे चला घटनाक्रम

  1. 11 फरवरी : बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में विलय की घोषणा की। इससे पूर्व उन्होंने विधायक बंधु तिर्की को अनुशासनहीनता के मामले में दोषी करार देते हुए बाहर का रास्ता दिखाया। जबकि प्रदीप यादव पर यह आरोप था कि वे कांग्रेस नेताओं से मिलकर दलीय अनुशासन तोड़ रहे हैं। कारण बताओ नोटिस का जवाब न मिलने के कारण उन्हें दल से निष्कासित किया गया।
  2. 17 फरवरी : बाबूलाल मरांडी ने गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में अपने दल झाविमो का भाजपा में विलय कर दिया।
  3. 24 फरवरी : भाजपा विधायक दल की बैठक में बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुना गया।
  4. 24 फरवरी : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने विधानसभा सचिव को पत्र सौंपकर बाबूलाल मरांडी को पार्टी विधायक दल का नेता चुने जाने की विधिवत सूचना दी।

Posted By: Alok Shahi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस