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झारखंड के बच्चों में कुष्ठ के 416 मामले, समय पर पहचान न होने से पांच दिव्यांग; देश में 11 फीसदी अकेले झारखंड से

Published: Mon, 05 Oct 2026 09:45 AM (IST)

झारखंड में 2025-26 के दौरान बच्चों में कुष्ठ के 416 मामले सामने आए, जिनमें से 5 बच्चे ग्रेड-2 दिव्यांगता तक ...और पढ़ें

झारखंड में कुष्ठ रोग के मिले कुल मरीजों में 6.06 प्रतिशत बच्चे।

झारखंड में कुष्ठ रोग के मिले कुल मरीजों में 6.06 प्रतिशत बच्चे।

HighLights

  1. झारखंड में बच्चों में कुष्ठ के 416 नए मामले दर्ज।

  2. पांच बच्चे कुष्ठ के कारण ग्रेड-2 दिव्यांगता तक पहुंचे।

  3. राज्य में कुष्ठ की व्यापकता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक।

नीरज अम्बष्ठ, रांची। झारखंड में वर्ष 2025-26 के दौरान बच्चों में कुष्ठ के 416 मामले मिले हैं।चिंता की बात यह है कि इनमें पांच बच्चे ऐसे हैं, जो कुष्ठ से पीड़ित होकर दिव्यांगता के ग्रेड-2 स्तर तक पहुंच चुके हैं। इनमें कुष्ठ के लक्षण की पहचान समय पर हो पाती तो उन्हें दिव्यांग होने से बचाया जा सकता था। यह स्थिति तब है जब भारत वर्ष 2023-27 के लिए नेशनल स्टेटजिक प्लान पर काम कर रहा है।

इसका उद्देश्य वर्ष 2027 तक जिला स्तर पर इसके संक्रमण को रोकना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट एनएलईपी (राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम )-2025-26 के अनुसार, भारत में 2025-26 में बच्चों में कुष्ठ रोग के 3,832 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 37 में बीमारी का पता चलने पर ग्रेड-2 दिव्यांगता थी, जो देरी से पता चलने का संकेत है।

बच्चों में यह केस लोड एनएलईपी के साल के लिए दो हजार मामलों के लक्ष्य से 91.6 प्रतिशत अधिक था। कुल दर्ज किए गए मामलों में 416 मामले झारखंड से थे। सो, कुल मामलों में झारखंड की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत रही। कुल मरीजों की बात करें तो झारखंड में वर्ष 2025-26 के दौरान 6,385 नए मामले चिह्नित किए गए, जिनमें 6.06 प्रतिशत बच्चे थे।

387 रोगी दिव्यांगता के ग्रेड-1 तथा 169 ग्रेड-2 तक पहुंच चुके

कुष्ठ की समय पर पहचान होने से उसका इलाज संभव है। इससे मरीजों को दिव्यांगता के स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता है। लेकिन चिंताजनक यह है कि झारखंड में वर्ष 2025-26 में 6,385 मरीजों की पहचान हुई।

उनमें 386 मरीज दिव्यांगता के ग्रेड-1 तथा 169 मरीज ग्रेड-2 स्तर तक पहुंच चुके थे। इस तरह, 5.64 प्रतिशत मामले ग्रेड-1 तथा 2.46 प्रतिशत मामले ग्रेड-2 स्तर के थे। यह राष्ट्रीय औसत क्रमश: 5.45 तथा 2.12 प्रतिशत से अधिक है।

प्रीविलिंस रेट एक से नीचे लाने का लक्ष्य, झारखंड में है 1.51

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार रोडमैप के तहत कुष्ठ की प्रीविलेंस रेट को प्रति दस हजार आबादी पर एक से नीचे लाने का लक्ष्य है। लेकिन झारखंड में यह दर 1.51 है जो राष्ट्रीय दर 0.56 से दोगुनी से भी अधिक है।

एनुअल न्यू केस डिटेक्शन रेट (एएनसीडीआर) की बात करें तो झारखंड में यह दर प्रति एक लाख आबादी पर 16.19 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 6.31 प्रतिशत ही है।

फैक्ट फाइल

  • झारखंड में कुष्ठ के कुल मरीजों में 1,111 मरीज (16.18 प्रतिशत) एससी तथा 2,230 मरीज (32.47 प्रतिशत) एसटी श्रेणी से थे।
  • कुल मरीजों में 2,697 (39.27 प्रतिशत) महिलाएं थीं।