झारखंड में 26 अक्टूबर से 108 एंबुलेंस सेवा ठप करने का ऐलान, वेतन नहीं मिलने से नाराज कर्मचारी करेंगे हड़ताल
झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। लंबित वेतन और अन्य मांगों को लेकर यह निर्णय लिया गया है।

झारखंड में 26 अक्टूबर से 108 एंबुलेंस सेवा ठप करने का ऐलान (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
26 अक्टूबर से झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा ठप।
लंबित वेतन और अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी हड़ताल पर।
राज्यभर में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होगी परेशानी।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा पर संकट गहराने लगा है। लंबित वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने 26 अक्टूबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इससे राज्यभर में 300 से अधिक एंबुलेंस का परिचालन ठप होने की आशंका है।
हड़ताल होने पर इमरजेंसी मरीजों, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू
संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने बताया कि पहले 21 अक्टूबर से हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, विभागीय आश्वासन के बाद तिथि आगे बढ़ाई गई। इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। ऐसे में अब 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
संघ की प्रमुख मांगों में जुलाई 2026 से लंबित वेतन का भुगतान, बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराना शामिल है।
इमरजेंसी मरीजों पर पड़ेगा असर
108 एंबुलेंस सेवा ठप होने से सड़क दुर्घटना, हृदयाघात और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हो सकती है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इसका असर अधिक पड़ने की आशंका है।
गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है। समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
हड़ताल की घोषणा के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने की बात सामने आई है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो सरकारी आपातकालीन परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में हड़ताल से पहले वैकल्पिक एंबुलेंस की व्यवस्था करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी।
