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बनी रहे सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता एवं उसका प्राकृतिक स्वरूप, जैन महासभा ने की राज्यपाल से अपील

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:09 PM (IST)

श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भेंट कर सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा और ...और पढ़ें

श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा ने राज्यपाल को इसपर पहल करने का किया अनुरोध।

श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा ने राज्यपाल को इसपर पहल करने का किया अनुरोध।

HighLights

  1. जैन महासभा ने राज्यपाल से सम्मेद शिखर पर की भेंट।

  2. तीर्थ की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण की मांग।

  3. तीर्थयात्रियों हेतु विशेष सुरक्षा, सुविधाएँ सुनिश्चित करने का आग्रह।

जागरण नेटवर्क, रांची। श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के एक शिष्टमंडल ने सोमवार को लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भेंट कर गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्म के पवित्र तीर्थ सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने को लेकर पहल का अनुरोध किया। शिष्टमंडल ने इसे लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा।

इसमें कहा गया कि सम्मेद शिखर जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ है और मान्यता है कि 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों सहित अनेक सिद्धात्माओं ने इसी पावन पर्वतराज पर मोक्ष प्राप्त किया। यह तीर्थ करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की आस्था एवं आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।

महासभा ने राज्यपाल से तीर्थराज की धार्मिक गरिमा एवं प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने, पर्वतराज एवं तीर्थ क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने तथा प्रवेश मार्गों पर जांच एवं निगरानी सुनिश्चित के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया।

साथ ही, तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध करने तथा स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सहायता एवं आवागमन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। शिष्टमंडल ने राज्यपाल से इस संवेदनशील विषय पर राज्य सरकार एवं संबंधित प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु निर्भीक होकर पूर्ण श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ तीर्थराज की वंदना कर सकें।

झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पहाड़ी) जैन धर्म का सर्वोच्च और सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया है। इस क्षेत्र को लेकर मुख्य विवाद और समस्या इसे 'पर्यटन स्थल' या 'इको-सेंसिटिव जोन' घोषित किए जाने को लेकर थी। आइए इसे विस्तार से समझें।

1. पर्यटन स्थल घोषित किए जाने का विरोध

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस क्षेत्र को पर्यटन और इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की अधिसूचना जारी की गई थी। जैन समाज का तर्क था कि यह कोई सामान्य पिकनिक स्पॉट या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि अत्यंत पवित्र आध्यात्मिक क्षेत्र है।

2. पवित्रता खंडित होने का डर

जैन समाज को इस बात की गहरी चिंता थी कि इसे पर्यटन क्षेत्र बनाए जाने से वहां होटल, रिसॉर्ट, मांसाहारी भोजन और मदिरा (शराब) की दुकानें खुल जाएंगी। इससे इस पावन क्षेत्र की अहिंसक, धार्मिक और सात्विक गरिमा तथा शुद्धता नष्ट होगी।

3.असामाजिक गतिविधियों की आशंका

पर्यटकों की अनियंत्रित आवाजाही से क्षेत्र में मांस-मदिरा के सेवन और अन्य असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने का अंदेशा था, जिससे जैन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती।

वर्तमान स्थिति और समाधान की दिशा में प्रयास

देश भर में जैन समाज के कड़े विरोध, प्रदर्शनों और संतों के अनशन के बाद सरकार पर भारी दबाव बना।
इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाए और स्पष्ट किया कि सम्मेद शिखरजी की पवित्रता से कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
वर्तमान में जैन समाज लगातार यह मांग करता रहा है कि इस क्षेत्र को किसी भी रूप में पर्यटन स्थल के बजाय केवल 'पवित्र धार्मिक क्षेत्र' (Pilgrimage Site) ही माना जाए और इसकी सुरक्षा व स्वच्छता के कड़े प्रबंध किए जाएं। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का मुख्य उद्देश्य भी इसी धार्मिक गरिमा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को पूरी तरह सुनिश्चित कराना है। 

(नोट- यह खबर श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा की ओर से जारीप्रेस रिलीज पर आधारित है।)

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