दीपावली के दिन जेल तोड़कर निकले थे जय प्रकाश; कैदियों की धोती से बनाई थी रस्सी, 84 साल बाद अजब संयोग
जयप्रकाश नारायण 8 नवंबर 1942 को दीपावली के दिन हजारीबाग जेल से भागकर भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए थे।

जयप्रकाश। एआई से बनाई गई तस्वीर
HighLights
जेपी 1942 में दीपावली पर हजारीबाग जेल से भागे।
कैदियों की धोती से रस्सी बनाकर 17 फीट दीवार फांदी।
उनके सामाजिक और सर्वोदय विचार आज भी अत्यंत प्रासंगिक।
दिव्यांशु, रांची। संपूर्ण क्रांति के प्रणेता और स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण आठ नवंबर 1942 को हजारीबाग जेल से भागकर भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए थे। उस दिन दीपावली थी और जेल में सामान्य दिनों की तुलना में सुरक्षा कम थी। 84 साल बाद आठ नवंबर 2026 को भी दीपावली है।
जेल की 17 फीट ऊंची दीवार पार करने के लिए जेपी ने कैदियों की धोती से रस्सी बनाई थी। उनके साथ बंद स्वतंत्रता सेनानियों ने एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर उनके लिए सीढ़ी बनाई। जेल से बाहर आने के बाद जेपी ने छात्रों और युवाओं से संवाद किया और स्वाधीनता आंदोलन में हिस्सा लिया।
आज सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर जारी बहस के संदर्भ में जेपी के विचारों को प्रासंगिक माना जा रहा है। देवघर कालेज के पूर्व प्राचार्य और जेपी के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में शामिल रहे प्रो. ताराचरण खवाड़े का कहना है कि 84 साल बाद भी जेपी का सामाजिक आंदोलन के प्रति जो विचार था उसे अपनाने की आवश्यकता है। अहिंसा के साथ सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहा जा सकता है यह जेपी ने सालों पहले बता दिया था।
अब जेपी का सर्वोदय विचार प्रासंगिक
‘जयप्रकाश है नाम’ पुस्तक के लेखक और आइपीएस अधिकारी प्रशांत आनंद जेपी के जेल से भागने और दीपावली के एक दिन पड़ने को महज संयोग नहीं मानते। उनके अनुसार, युवा, किसान और प्रोफेशनल्स समेत समाज के सभी वर्गों के लिए जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी अहम हैं।
आनंद ने कहा कि डाटा पर नियंत्रण के इस दौर में लोगों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जेपी की सर्वोदय अवधारणा उपयोगी है। डाटा का न्यायपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए समाज को उनके विचारों पर चलना होगा।
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