लोकनायक के जीवन पर IPS प्रशांत आनंद की पुस्तक 'जय प्रकाश है नाम', जेपी बताया गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी
आईपीएस अधिकारी प्रशांत आनंद ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर 'जय प्रकाश है नाम' नामक पुस्तक लिखी है, जिसका विमोचन 11 ...और पढ़ें

जमशेदपुर के सिटी एसपी रहते तत्कालीन एसएसपी अनूप टी मैथ्यू के साथ प्रशांत आनंद।
HighLights
आईपीएस प्रशांत आनंद ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर नई पुस्तक लिखी है।
पुस्तक 'जय प्रकाश है नाम' जेपी के सर्वोदय दर्शन पर आधारित है।
11 अक्टूबर को दिल्ली में होगा इस पुस्तक का भव्य विमोचन।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। झारखंड कैडर के आइपीएस अधिकारी प्रशांत आनंद ने लोकनायक पर पुस्तक लिखी है, जय प्रकाश है नाम। खुद लोकनायक ने कई पुस्तकें लिखी हैं। जेपी के जीवन पर और भी कई पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। प्रशांत आनंद को भी इसका भान है। इसलिए उन्होंने तनिक हट कर लोकनायक के जीवन चरित्र को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
जेपी के सर्वोदय दर्शन की पुस्तक में विवेचना की गई है। 11 अक्टूबर को लोकनायक की 125वीं जयंती है। उस दिन दिल्ली के लोकनायक पार्क में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय पुस्तक का विमोचन करेंगे।
प्रशांत आनंद का बचपन भागलपुर गांधी आश्रम में गुजरा है। उनका बाल मन बापू, बिनोवा भावे और जय प्रकाश नारायण का कथानक सुनता रहा है। तीनों महापुरुषों के बारे में उन्होंने सुना, जाना और समझा है। लोकनायक के जीवन दर्शन का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। इससे उन्हें लोकनायक पर लिखने की प्रेरणा मिली। प्रशांत आनंद कहते हैं, बापू के दो चरित्र रहे हैं।
बापू के आध्यात्मिक चरित्र का उत्तराधिकार बिनोवा भावे के पास गया तो राजनीतिक दर्शन को लोकनायक ने अपनाया। बापू के दौर में विश्व भर में मार्क्सवाद के वर्ग संघर्ष की विचारधारा थी। बापू ने वर्ग सहयोग की अवधारणा पर जोर दिया जिसे जेपी ने अपनाया। न बापू ने कोई पद लिया न लोकनायक ने। जेपी मूवमेंट तब हुआ था जब लोकनायक राजनीति से संन्यास ले चुके थे।

पीएलएफआई के दिनेश गोप को नेपाल से पकड़ा था
प्रशांत आनंद 2013 बैच के झारखंड कैडर के आइपीएस अधिकारी हैं। वे हटिया एएसपी, जमशेदपुर के सिटी एसपी और लातेहार एसपी रहे हैं। झारखंड के जिलों में उनकी तैनाती कम रही है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) में सेवा दी है। अब उनकी झारखंड में वापसी हो चुकी है।
स्मरणीय है कि एनआइए में रहते उन्होंने 2023 में झारखंड के 30 लाख के इनामी दिनेश गोप को नेपाल से गिरफ्तार किया था जो प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपल्स लिबरेशन फ्रंड आफ इंडिया का सुप्रीमो था।
कोल्हान के माफिया अखिलेश सिंह की गिरफ्तारी में भी अनूप टी मैथ्यू के साथ प्रशांत आनंद ने बड़ी भूमिका निभाई है। वे इससे पहले प्राचीन भारत के शासकों और उनके नेतृत्व पर आधारित राज कौशल और रूल्स टू रूल पुस्तक लिख चुके हैं।
