रांची, राब्यू। जज उत्तम आनंद हत्याकांड में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के ज्वाइंट डायरेक्टर अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने जांच के बारे में अदालत को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे बीस ऑफिसर दिन-रात इस केस को सॉल्व करने के लिए लगे हुए हैं। हालांकि अभी कोई लीड नहीं मिल पाई है। लेकिन सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है।

उन्होंने स्वीकार किया कि पकड़े गए दो आरोपितों में से एक प्रोफेशनल मोबाइल चुराने वाला है। वह बहुत ही चालाक है और जांच एजेंसी को हर बार नई कहानी बताकर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सीबीआइ ऑफिसर उसे कड़ाई से पूछताछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिल्कुल साफ हो गया है कि जज को जानबूझकर टक्कर मारी गई थी। लेकिन इसका षड्यंत्र करने वालों तक जल्द ही सीबीआइ पहुंच जाएगी।

अदालत ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी जज की हत्या की गई है। उन्होंने मौखिक टिप्पणी की कि इस घटना की वजह से न्यायिक पदाधिकारियों का मोरल डाउन है। अगर जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा नहीं किया गया तो यह न्याय व्यवस्था के लिए ठीक नहीं होगा।

इसके पूर्व झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड मामले में सुनवाई जांच पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से कहा था कि दिनदहाड़े एक न्यायिक पदाधिकारी की हत्या हुई है। हमें सिर्फ रिपोर्ट नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए। इसके बाद अदालत ने 23 सितंबर को सीबीआइ के जोनल निदेशक को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हर सप्ताह जांच की समीक्षा की जा रही है, लेकिन सीबीआइ की प्रगति रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है।

अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखकर पता चलता है कि दिनदहाड़े एक न्यायिक अधिकारी की हत्या की गई है। कोर्ट यह स्पष्ट कर रही है कि हमें रिजल्ट चाहिए, सिर्फ रिपोर्ट देने से काम नहीं चलेगा। सीबीआइ अभी भी सिर्फ दो लोगों से आगे नहीं बढ़ सकी है। आटो चालक ने धक्का मारकर जज की हत्या क्यों की यह मिस्ट्री अभी तक हल क्यों नहीं हो सकी है। सीबीआइ की जांच में क्या निकलता है, इसकी जानकारी कोर्ट को होनी चाहिए।

अदालत ने कहा कि यह पहला मामला है जिसमें आटो को हत्या के लिए हथियार के रूप में प्रयोग किया गया है, ताकि जांच एजेंसियां उलझ जाएं।

कोर्ट ने कहा था कि सीसीटीवी फुटेज देखने से यह स्पष्ट होता है कि आटो वाले ने जानबूझकर जज को धक्का मारा है। लेकिन इस मामले में सीबीआइ अभी भी अंधेरे में तीर चला रही है। सीबीआइ ने अपनी ओर से काफी प्रयास किया है, ब्रेन मैपिंग और नारको टेस्ट सहित कई जांच कराए हैं, लेकिन षडयंत्र और हत्या के पीछे की वजह से का पता नहीं चल पाया है और हर बार सीबीआइ अगली बार कुछ नया होने की बात कहती है, लेकिन अभी तक सीबीआइ इस मामले में दो आरोपितों से आगे नहीं बढ़ पाई है। जबकि झारखंड पुलिस ने घटना को 12 घंटे में ही दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था।

 

Edited By: Kanchan Singh