यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नक्सल अभियान के लिए मिले हेलीकॉप्टर में उड़े मंत्री और नेता
नक्सल अभियान में शामिल हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नेताओं और अधिकारियों ने खुद के लिए भी किया।

आशीष झा, रांची। नक्सल अभियान में शामिल होने के लिए पुलिस को ध्रुव हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल की अनुमति मिली तो इसका इस्तेमाल नेताओं और अधिकारियों ने खुद के लिए भी जमकर किया। जनवरी से अक्टूबर 2016 तक कुल 40 उड़ानों में से 15 का उपयोग तो मंत्रियों एवं अधिकारियों ने नक्सल अभियान के उद्देश्यों से हटकर किया। इसमें जनवरी से मार्च तक ही सात उड़ानें शामिल थीं।
कैग (नियंत्रक-महानिरीक्षक) ने पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक में हुई गड़बडि़यों का खुलासा करते हुए बताया है कि यह सारा काम गृह मंत्रालय (भारत सरकार) की अनुमति के बगैर किया गया। अप्रैल 2015 में गृह विभाग ने केंद्र से मांग की थी कि धु्रव हेलीकॉप्टर के रखरखाव व परिचालन लागत को सुरक्षा संबधी व्यय योजना के तहत शामिल किया जाए। यह प्रस्ताव केंद्र में गृह मंत्रालय ने अस्वीकार कर दिया और सितंबर में इससे संबंधित एक पत्राचार भी हुआ। इसके बावजूद झारखंड सरकार के गृह विभाग ने धु्रव हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल जारी रखा।
दावा किया गया कि यह नक्सल अभियान के लिए जरूरी है लेकिन ऐसा नहीं था। 37 फीसद उड़ानों का संबंध नक्सल अभियान से नहीं था और इसमें मंत्री, नेता और अधिकारी अन्य कारणों से शामिल होते रहे। अब खर्च की जवाबदेही पर सवाल उठ रहा है। भारत सरकार के सामने 16.91 करोड़ रुपये का दावा धु्रव हेलीकॉप्टर के नाम पर किया गया जिसे अस्वीकार कर दिया गया है।
कहां-कहां खर्च
ईंधन व्यय, बोर्डिंग, यात्रा बिल, प्रशिक्षण, हैंगर में बिजली-पानी, हेलीकॉप्टर के रखरखाव से लेकर पायलट के मोबाइल को चार्ज कराने तक का बिल शामिल है।
सोशल पुलिसिंग के नाम पर भी लाखों की फिजूलखर्ची
नक्सल प्रभावित जिलों में भारत सरकार ने विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यक्रमों में शरीक होने के लिए पुलिस अधीक्षकों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति प्रदान की थी जिसे अप्रैल 2013 से 10 लाख रुपये कर दिया गया था। इस राशि के अतिरिक्त पुलिस ने बड़े पैमाने पर लाखों रुपये खर्च किए जिसका भुगतान लंबित है। राज्य के सात जिलों में 1.29 करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची हुई।
कहां खर्च करना था
- गांवों में स्वास्थ्य शिविर, खेलकूद सामग्री का वितरण, प्रतियोगिता का आयोजन, आदिवासी त्योहारों में भागीदारी।
कहां खर्च किया
- साइकिल, धोती-साड़ी, टीवी, कुर्सियां, कंबल और कॉपी की खरीदारी नियम विरुद्ध हुई।
किस जिले में कितनी फिजूलखर्ची
रांची : 26.24 लाख रुपये
पलामू : 12.01 लाख रुपये
गढ़वा : 11.44 लाख रुपये
लातेहार : 8.87 लाख रुपये
चाईबासा : 18.36 लाख रुपये
देवघर : 12.17 लाख रुपये
धनबाद : 6.87 लाख रुपये
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