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रांची: HEC में अब हर बड़े खर्चे पर होगी नजर, वित्तीय निगरानी के लिए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति; शुरू हुई प्रक्रिया

Published: Wed, 23 Sep 2026 10:30 PM (IST)

वित्तीय संकट से जूझ रही एचईसी में अब आंतरिक वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति ...और पढ़ें

HEC की फाइल फोटो। जागरण

HEC की फाइल फोटो। जागरण

जागरण संवाददाता, रांची। वित्तीय संकट से जूझ रहे हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) में अब आंतरिक वित्तीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। कंपनी में इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

इसके लिए योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट/कास्ट अकाउंटेंट फर्म से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति के बाद कंपनी के वित्तीय लेन-देन, खरीद, भुगतान, स्टोर, ठेके और विभिन्न विभागों के खर्च की स्वतंत्र आंतरिक जांच का रास्ता साफ होगा। एचईसी में लंबे समय से इंटरनल ऑडिट की व्यवस्था विभागीय स्तर पर चलती रही है। हालिया स्वतंत्र ऑडिट में भी इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

खासकर वित्तीय वर्ष 2024-25 की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट बाहरी ऑडिटर के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने का मुद्दा सामने आया है। ऐसे में अब स्वतंत्र इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति को कंपनी की वित्तीय व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कंपनी के हर बड़े खर्च पर होगी नजर

इंटरनल ऑडिटर की भूमिका केवल खाते मिलाने तक सीमित नहीं होगी। कंपनी के वित्तीय कामकाज में खरीद से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया, स्टोर में सामग्री की स्थिति, ठेकेदारों के बिल, विभागीय खर्च, कंपनी की संपत्तियों और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था की भी जांच की जा सकती है।

एचईसी की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसका महत्व और बढ़ जाता है। कंपनी के सामने सीमित संसाधनों में उत्पादन बढ़ाने, पुराने आर्डर पूरे करने और कर्मचारियों के लंबित भुगतान की चुनौती है। ऐसे में कंपनी के पास आने और खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये की निगरानी जरूरी है।

कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम

एचईसी के कर्मचारियों के वेतन और अन्य बकाये लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। कंपनी के पास उपलब्ध धन का इस्तेमाल कहां और किस प्राथमिकता से हो रहा है, इसकी पारदर्शी निगरानी कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मजबूत इंटरनल ऑडिट व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी विभाग में अनावश्यक खर्च तो नहीं हो रहा, खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन हो रहा है या नहीं और कंपनी की संपत्तियों व संसाधनों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हो रहा है या नहीं। इससे भविष्य में किसी वित्तीय अनियमितता या प्रक्रिया संबंधी कमी का पता बाहरी आडिट के इंतजार के बजाय कंपनी के स्तर पर ही लगाया जा सकेगा।

कई साल से उठता रहा है सवाल

एचईसी में स्वतंत्र इंटरनल ऑडिट को लेकर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। कंपनी की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट में भी इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति नहीं होने और आंतरिक टीम के माध्यम से ऑडिट किए जाने का उल्लेख था। यानी स्वतंत्र आंतरिक निगरानी व्यवस्था को लेकर समस्या नई नहीं है।

ऑडिटर बताएगा कहां है वित्तीय जोखिम

इंटरनल ऑडिट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य कंपनी के भीतर मौजूद वित्तीय जोखिम की पहचान करना भी होगा। किसी भुगतान में देरी, खरीद में अनावश्यक खर्च, स्टोर प्रबंधन में कमी, लंबित समायोजन या किसी प्रक्रिया में नियंत्रण कमजोर होने जैसी स्थिति की पहचान समय रहते की जा सकती है।

उत्पादन बढ़ाने और कंपनी को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के साथ वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी बनाना भी जरूरी है। ऐसे में इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति एचईसी के गवर्नेंस सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

-राणा एस चक्रवर्ती, पूर्व डायरेक्टर, एचईसी 

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