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झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई, बाबूलाल ने दाखिल की है याचिका

Published: Wed, 23 Sep 2026 08:26 PM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 08:35 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट में झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले की सुनवाई जारी है, जहां सरकार ने नियम संशोधन को तदाशा मिश्रा को ...और पढ़ें

बाबूलाल मरांडी की ओर से दाखिल की गई है याचिका।

बाबूलाल मरांडी की ओर से दाखिल की गई है याचिका।

HighLights

  1. डीजीपी नियुक्ति मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।

  2. सरकार ने तदाशा मिश्रा को मौका देने के लिए नियम बदले।

  3. न्याय मित्र की रिपोर्ट पर सरकार गुरुवार को पक्ष रखेगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट में झारखंड की डीजीपी नियुक्ति को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की तरफ से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि डीजीपी रैंक में प्रोन्नत महिला अधिकारी तदाशा मिश्रा को मौका देने के लिए नियम में संशोधन किया गया।

कपिल सिब्बल ने बाबूलाल मरांडी की ओर से डीजीपी नियुक्ति में मनमानी करने की दलील के जवाब में उक्त बात कही। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि न्याय मित्र की रिपोर्ट पर सरकार का पक्ष गुरुवार को पेश करेंगें।

बुधवार को पहली पाली में सिर्फ ओड़िशा के मामले में सुनवाई हो सकी थी। इसके बाद दूसरी पाली में भी सुनवाई हुई, जो गुरूवार को भी जारी रहेगी। बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दूसरी पाली में ओड़िशा के आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ की ओर से उनकी सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र वापस लिए जाने को गलत साबित करने के लिए दलील पेश की गई।

इसके बाद बाबूलाल मरांडी की ओर से डीजीपी नियुक्ति के मामले में दलील पेश करते हुए यह कहा गया कि झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति में मनमानी की जाती है। यूपीएससी के पैनल से नियुक्त डीजीपी को समय से पहले पद से हटा दिया गया।

बाद में उन्होंने खुद ही इस पर रहने की अनिच्छा जतई। इसके बाद राज्य सरकार ने डीजीपी नियुक्ति के लिए अपना नियम बनाया। इस नियम के आलोक में अनुराग गुप्ता को डीजीपी बनाया गया। लेकिन केंद्र सरकार ने अनुराग गुप्ता के रिटायमेंट के बाद सेवा विस्तार का लाभ देने से इन्कार कर दिया।

इसके बाद इस नियम में बदलाव कर रिटायरमेंट से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा को डीजीपी के पद पर नियुक्त किया गया। न्याय मित्र ने भी नियम में संशोधन और डीजीपी की नियुक्ति को गलत बताया है। बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील समाप्त होने के बाद वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार की ओर से जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के आलोक में डीजीपी नियुक्ति नियमावली बनायी है। न्याय मित्र ने सिर्फ नियम-5 में संशोधन पर आपत्ति की है। कपिल सिब्बल ने नियम-5 संशोधन की बात स्वीकार की। साथ ही यह भी कहा कि तदाशा मिश्रा डीजीपी रैंक में प्रोन्नत इकलौती महिला अधिकारी हैं। उन्होंने नक्सल व अपराध के क्षेत्र में प्रभावकारी काम किया है।

सरकार ने इस इकलौती महिला अफसर को मौका देने के लिए नियम-5 में संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि वह न्याय मित्र की रिपोर्ट पर गुरुवार को राज्य सरकार का पक्ष पेश करेंगे।