केंद्र ने राज्य सरकार को दिए निर्देश, उठाए कई मामले -स्टाफ नर्सो के सृजित हों और पद, डॉक्टरों की करें नियुक्ति

-डायलिसिस के लिए सदर अस्पतालों में नहीं मिल रही जगह

नीरज अम्बष्ठ, रांची :

राज्य के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर मरीजों को जेनरिक दवा लिखें, इसके लिए उनके द्वारा लिखे गए पुर्जे की ऑडिट होगी। केंद्र सरकार ने पुर्जे के लिए ऑडिट मैकेनिज्म लागू करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। केंद्र ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत झारखंड से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मुद्दे उठाए हैं जिनमें एक यह भी है। केंद्र ने सरकारी अस्पतालों में दवा की उपलब्धता और वितरण के लिए सूचना तकनीक से जुड़े सप्लाई चेन सिस्टम के क्रियान्वयन को भी मजबूत करने को कहा है।

केंद्र ने टीबी नियंत्रण के लिए दवा दुकानों तथा निजी डॉक्टरों द्वारा मरीजों के नोटिफिकेशन पर राज्य सरकार को ध्यान देने को कहा है। दवा दुकानों और निजी डॉक्टरों को टीबी के मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को अनिवार्य रूप से देनी है, लेकिन राज्य में अभी तक यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। केंद्र ने पुनरीक्षित यक्ष्मा नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सिविल कार्यो और मानदेय भुगतान राज्य स्तर पर लंबित होने की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया है।

केंद्र के अनुसार झारखंड में प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम 24 जिलों में से आठ जिलों में क्रियान्वित किया गया है। लेकिन सर्विस प्रोवाइडर कार्य करने में असमर्थ हैं क्योंकि राज्य सरकार पिछले दो वर्षो में उन्हें स्थान उपलब्ध नहीं करा पाई है। केंद्र ने राज्य सरकार को इस विषय पर तुरंत ध्यान देने को कहा है। केंद्र ने 'लक्ष्य' प्रोग्राम की शुरुआत करने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई है। खासकर आकांक्षी जिलों में। झारखंड में 23 सदर अस्पतालों, तीन मेडिकल कॉलेजों तथा 22 फ‌र्स्ट रेफरल यूनिटों में लेबर रूम तथा ओटी के लिए लक्ष्य सर्टिफिकेशन का कार्य अभी नहीं हो सका है। बता दें कि लक्ष्य कार्यक्रम के तहत इन अस्पतालों में लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर को सुदृढ़ किया जाना है। केंद्र ने स्वास्थ्य केंद्रो में स्टाफ नर्सो के और पद सृजित करने तथा स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की वर्तमान रिक्तियों को भरने का भी निर्देश दिया है।

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15 अगस्त तक चालू हों 16 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

राज्य में 11 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कार्यशील हैं। केंद्र ने 15 अगस्त तक 16 अन्य सेंटरों को भी कार्यशील बनाने की दिशा में काम करने को कहा है।

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वित्तीय मामले भी उठाए

केंद्र ने वित्तीय मामले भी उठाए हैं। इसके तहत कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा 196.56 करोड़ रुपये का स्टेट मैचिंग शेयर दिया जाना बाकी है। वहीं, एनएचएम के तहत 637.38 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए हैं। साथ ही वर्ष 2017-18 में रिलीज की गई केंद्रीय अनुदान निधि की पूरी राशि राज्य के राज्य कोष में स्वास्थ्य सोसाइटी के बैंक खाते में हस्तांतरित नहीं की गई है।

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Posted By: Jagran

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