रांची, राज्य ब्यूरो। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने बच्चों के कुपोषण की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि झारखंड में कुपोषण, एनीमिया और ट्रैफिकिंग गंभीर समस्या है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसका हल शीघ्र और सक्रियता से निकालना होगा।

चूंकि इससे आदिवासी खासकर लुप्तप्राय जनजाति के लोग अधिक ग्रसित हैं, इसलिए इस दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने बालआश्रयों से बच्चों के बेचे जाने के मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए ऐसे मामलों पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए गुरुवार को स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई।

इसमें उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश में पोषण के क्षेत्र में झारखंड की स्थिति अच्छी नहीं है। पांच वर्ष से कम आयु के लगभग आधे बच्चे मानक वजन से कम के हैं। वे कुपोषण और खून की कमी की गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं।

बैठक में समाज कल्याण विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने राज्यपाल को बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनवितरण प्रणाली के तहत लाभुकों को चावल प्रदान किया जा रहा है तथा शहरी क्षेत्रों में चावल के साथ गेहूं भी दिया जा रहा है। जनवितरण प्रणाली केतहत दाल भी दिए जाने का प्रस्ताव है।

यह भी बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्ताह में बच्चों को तीन दिन अंडा देना शुरू कर दिया गया है। मध्याह्न भोजन के तहत बच्चों को अंडा या फल पहले से ही दिया जा रहा है।

यह भी बताया कि पोषण मिशन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के सेविका-सहायिका का प्रशिक्षण राज्य के छह जिलों में आयोजित किया जा रहा है। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य 14 जिलों में इसे शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव डा. नितिन कुलकर्णी, झारखंड पोषण मिशन के महानिदेशक डीके सक्सेना, एनएचएम के अभियान निदेशक केएन झा व अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। बता दें कि दैनिक जागरण ने राष्ट्रीय सुपोषण सप्ताह के दौरान लगातार राज्य में पोषण की स्थिति की खबरें प्रकाशित की। लोगों में जागरुकता लाने का भी प्रयास किया।

आदिम जनजातियों की करें नियमित जांच : राज्यपाल ने स्वास्थ्य व समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लुप्तप्राय आदिम जनजाति के लोगों का नियमित सर्वेक्षण कर उनकी स्वास्थ्य जांच करें। कहा, पोषण सखी एवं तेजस्विनी जैसी योजनाओं का लाभ उन्हें निश्चित रूप से मिले। साथ ही बाल विकास परियोजना के अंतर्गत पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) आदि रिक्त 340 पदों को तुरंत भरने का भी निर्देश दिया।

एससी, एसटी में समस्या अधिक : बैठक में यूनिसेफ की राज्य प्रमुख मधुलिका जोनाथन ने कहा कि कुपोषण की समस्या राज्य में सामान्य वर्ग से अनुसूचित जनजाति में 15 फीसद तथा अनुसूचित जाति में 10 फीसद अधिक है।

Posted By: Jagran