रांची, राज्य ब्यूरो। Good News कभी पलामू, चतरा और संताल परगना के सुदूर इलाके सबसे कम विद्युत की उपलब्धता वाले जिलों में शुमार थे। गढ़वा में जब ग्रिड नहीं था तो यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश से मिलने वाली बिजली पर निर्भर था। अब स्थिति तेजी से बदल चुकी है। ग्रिड के निर्माण ने बिजली की उपलब्धता सहज कर दी है तो राज्य सरकार गोविंदपुर हाइवे के आसपास के क्षेत्र को बतौर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना बना रही है। ईटखोरी में ग्रिड का निर्माण होने से केंद्रीय उपक्रम दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) पर निर्भरता खत्म हुई है। इसका लाभ समीपवर्ती दो जिलों को मिल रहा है। यह बदलाव रातोंरात नहीं हुआ।

इन सुदूर इलाकों में बिजली के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण करना आसान भी नहीं था, लेकिन सतत प्रयास से यह संभव हो पाया। आने वाले वर्षों में इसकी बदौलत बिजली की सरप्लस उपलब्धता राज्य में होगी। इन कोशिशों से आगे अगले 20-25 सालों में राज्य में विद्युत क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। फिलहाल निर्भरता ताप विद्युत प्रतिष्ठानों पर है, लेकिन जिस तेजी से गैर परंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास हो रहा है, उससे झारखंड सौर ऊर्जा से जगमग होगा।

तमाम योजनाओं को धरातल पर उतरने में वक्त लगेगा, लेकिन इससे राज्य में लगभग 5000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है। यह बदलाव पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होगा, जिसकी वकालत वैश्विक स्तर पर की जा रही है। कोयले का सीमित भंडार और ताप विद्युत संयंत्रों से होने वाला प्रदूषण भी इस बाबत बाध्य कर रहा है कि झारखंड गैर परंपरागत ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत को विकसित करे। फिलहाल सरकार ने 1700 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क और लघु सोलर पार्क, 900 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट, 400 मेगावाट का सोलर कैनाल टाप, 250 मेगावाट सोलर रूफटाप, 1000 सोलर ग्राम बनाने का लक्ष्य और 250 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन किसानों की बंजर जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगाकर करने की योजना है।

ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाएंगी ये योजनाएं

1. सोलर माइक्रो, मिनी ग्रिड - सुदूर इलाकों में यह योजना प्रभावी होगी, जहां बिजली वितरण करना काफी मुश्किल होता है और यह सघन वन क्षेत्र का इलाका होगा। जेरेडा ने ऐसे 246 गांवों को विद्युतीकृत कर दिया है। इस तहत बिजली से वंचित गांव प्राथमिकता से जोड़ें जाएंगे।

2. कैनाल टाप सोलर पावर प्लांट - गुजरात ने इसका बेहतर प्रयोग करते हुए नर्मदा नहर पर 532 किलोमीटर लंबा सोलर पावर प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसी की तर्ज पर जेरेडा ने सिकिदरी कैनाल पर दो मेगावाट का ग्रिड विकसित करने की योजना बनाई है। इसमें अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता नहीं है। कैनाल के उपर प्लांट लगाने से पानी का वाष्पीकरण कम होगा। जमीन पर लगने वाले सोलर पावर प्लांट के मुकाबले इसकी क्षमता 2.5 प्रतिशत अधिक होगी।

3. सोलर सिटी - इस कार्यक्रम के तहत पूरा शहर सौर ऊर्जा से आच्छादित होगा। फिलहाल मास्टर प्लान के तहत गिरिडीह का चयन इसके लिए किया गया है। शहर की सारी आवश्यकताएं सौर ऊर्जा के जरिए पूरी होगी। राज्य सरकार इसके लिए विशेष रियायत भी देगी।

4. सोलर पार्क - विभिन्न शहरों में सोलर पार्क का निर्माण बड़े भूखंड पर किया जाएगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन को भी इसके लिए अध्ययन करने को कहा गया है।

5. माइक्रो, मिनी हाइडेल प्लांट - जेरेडा ने 13 माइक्रो और मिनी हाइडेल पावर प्लांट विकसित करने की योजना बनाई है। इसकी क्षमता 125 मेगावाट तक होगी। इसके लिए कोई ईंधन की

आवश्यकता नहीं होगी। इससे वायु प्रदूषण नहीं होगा। पानी का उपयोग करने से बाढ़ नियंत्रण प्रभावी होगा और इसका उपयोग सिंचाई के लिए हो सकेगा।

6. सोलर पावर कोल्ड स्टोरेज - ग्रामीण इलाकों में छोटे कोल्ड स्टोरेज का संचालन सौर ऊर्जा के जरिए करने की योजना है। इससे ग्रिड सप्लाई और डीजल पर निर्भरता कम होगी। इसपर लागत भी अपेक्षाकृत कम आएगा। इससे प्रदूषण कम होगा और वेस्टेज कम होगा।

कुछ ऐसी संरचना तैयार होगी सौर ऊर्जा की

  • 1700 मेगावाट - सोलर पार्क और लघु सोलर पार्क
  • 900 मेगावाट - फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट
  • 400 मेगावाट - सोलर कैनाल टाप
  • 250 मेगावाट - सोलर रूफटाप
  • 1000 सोलर ग्राम बनाने का लक्ष्य
  • 120 मेगावाट - सोलर पंपसेट
  • 250 मेगावाट - किसानों की बंजर जमीन पर सोलर प्लांट

राज्य के विद्युत प्रतिष्ठान

  • टीवीएनएल - अधिष्ठापित क्षमता 420 मेगावाट
  • पीयूवीएनएल - 2400 मेगावाट (प्रस्तावित)
  • सिकिदरी हाइडेल - 120 मेगावाट
  • इनलैंड पावर, आधुनिक पावर (निजी उत्पादक)

बिजली में हम कहां खड़े

  • -राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली खपत - 628 यूनिट सालाना
  • -राष्ट्रीय औसत - 1122 यूनिट सालाना
  • -37 लाख एलटी और 1700 एचटी उपभोक्ता
  • -पीक लोड अधिकतम - 3000 मेगावाट
  • -सात एरिया बोर्ड - रांची, धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह, दुमका और मेदिनीनगर
  • - 15 अंचल , 44 डिविजन, 120 सब-डिविजन एवं 350 सेक्शन कार्यालय
  • बिजली की पहुंच - 90 प्रतिशत

Edited By: Alok Shahi