रांची, [आशीष झा]। वाहन स्वामियों को जुर्माना अब सिर्फ और सिर्फ ई-चालान के माध्यम से भरना होगा। चाहे बिना हेलमेट के पकड़े जाने का मामला हो या फिर ओवरलोडिंग ट्रक का। जुर्माना ऑनलाइन कटेगा और भुगतान ई-चालान से होगा। इस प्रकार कोई पाकुड़ में गलती करे या कोयंबटूर में, उसका आंकड़ा राष्ट्रीय सर्वर में फीड हो जाएगा और फिर अगली गलती पर खुद पता चल जाएगा कि ड्राइवर इस प्रकार की गड़बड़ी पहले भी कर चुका है। ऐसे में बार-बार अपराध करने वालों की पहचान भी आसान हो जाएगी।

फिलहाल सिर्फ रांची में ई-चालान कट रहा है। राज्य सरकार ने ई-चालान व्यवस्था शुरू करने के लिए बैंकों से साझेदारी के लिए आवेदन (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी ईओआइ) मांगा है। चालान के लिए उन्हीं बैंकों को आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने देश में 10 वर्ष से अधिक की सेवा दी हो और इस तरह के कार्यो का अनुभव हो। सरकारी और प्राइवेट बैंकों से भी आवेदन करने को कहा गया है। बैंकों के माध्यम से जुर्माना अदा करने की व्यवस्था लागू होने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस और अधिकारियों से मिलीभगत कर जुर्माना कम कराने की कोशिशों में भी कमी आएगी।

ऑनलाइन कटता है जुर्माना, लेकिन जानकारी सर्वर को नहीं : वर्तमान में रांची में ऑनलाइन जुर्माना कटता है, लेकिन राष्ट्रीय सर्वर में यह डाटा फीड नहीं हो पा रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि जुर्माना काटने के लिए जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा है, वह उसी कंपनी की है, जिसने मशीन की आपूर्ति की है। इस मशीन के आंकड़ों को राष्ट्रीय सर्वर के साथ नहीं जोड़ा जा सका है। अब नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सभी प्रकार का जुर्माना परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर (वाहन) के माध्यम से वसूला जाएगा।

सेकेंड-थर्ड ऑफेंस की जानकारी नहीं हो पा रही सार्वजनिक : संशोधित मोटरयान अधिनियम के लागू होने के बाद एक ही तरह की दूसरी गलती पर दोगुना या अधिक जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। कुछ मामलों में पहले भी ऐसा था, लेकिन रिकॉर्ड एक जगह नहीं आ पाने के कारण दूसरी या तीसरी गलती (सेकेंड-थर्ड ऑफेंस) के मामले की जानकारी नहीं हो पाती थी। इस तरह के दोषी कार्रवाई से बच जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

आम लोग ऑनलाइन ही जुर्माना अदा कर सकेंगे, वह भी कार्ड से : इस व्यवस्था के लागू होने से आम लोग क्रेडिट अथवा डेबिट कार्ड से जुर्माना अदा कर पाएंगे। अभी कार्ड से भुगतान की व्यवस्था पूरे राज्य में नहीं है। चयनित बैंक सभी जिलों को उपकरण भी मुहैया कराएंगे और समय-समय पर इसकी देखरेख भी करेंगे। बदले में वसूली गई राशि से एक हिस्सा बैंक के खाते में भी जाएगा।

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