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Jharkhand: दुमका के रहमूल ने 19 साल से नहीं खाया था खाना, डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दी नई जिंदगी

Dumka news रहमूल के पिता बताते हैं कि जन्म से लेकर अब तक रहमूल ने अनाज का एक दाना तक नहीं खाया। ना सिर्फ खाने में बल्कि बोलने में भी उसको काफी दिक्कतों का सामना करना पर रहा था।

By Vikash kumarEdited By: Roma RaginiPublished: Sun, 05 Feb 2023 10:44 AM (IST)Updated: Sun, 05 Feb 2023 10:46 AM (IST)
युवक ने 20 साल से नहीं खाया खाना

रांची, जागरण संवाददाता। जीवन का सबसे और अहम क्रिया है खाना खाना। हम रोज तरह-तरह के पकवान और स्वाद का आनंद लेते हैं। इतनी डिश हैं कि हम गिनती भूल जाए और सबके इतने अलग-अलग स्वाद हैं लेकिन अगर हम खाना ही न खाए पाए तो क्या होगा। दुमका का एक शख्स है, जिसने 19 साल से खाना ही नहीं खाया। एक बीमारी से ग्रसित रहमूल अंसारी की कहानी दर्दभरी है।

बता दें कि दुमका निवासी 19 साल के रहमूल अंसारी को टेम्पोरोमेंडीबुलर ज्वाइंट ऐंकलोसिस नामक गंभीर बीमारी थी। वे जन्म से ही इस बीमारी से ग्रसित थे। इस बीमारी के कारण जन्म से लेकर अब तक वो मुंह खोलने में पूरी तरह से असमर्थ थे। मुंह पूरी तरह से बंद होने के कारण वो पिछले 19 साल से सिर्फ पेय पदार्थ पर जीवित थे। इन 19 सालों में उन्होंने अन्न का एक दाना नहीं खाया था।

रहमूल के पिता बताते हैं कि जन्म से लेकर अब तक रहमूल ने अनाज का एक दाना तक नहीं खाया। ना सिर्फ खाने में बल्कि बोलने में भी उसको काफी दिक्कतों का सामना करना पर रहा था। ऐसे में उसकी जिंदगी बेहद मुश्किल से गुजर रही थी। परिवार के लोग परेशान थे। इसी बीच परिजन रहमूल को हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल लेकर आए।

हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल में मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. अनुज की टीम ने दो फरवरी को रहमूल की सर्जरी की। सर्जरी कामयाब रही। जिसके बाद आखिरकार 19 साल के बाद मरीज अपने मुंह को खोल पाने में सक्षम हुआ।

बीमारी को लेकर डॉक्टर अनुज ने बताया कि टेम्पोरोमेंडीबुलर जाइंट ऐंकलोसिस की ना सिर्फ सर्जरी जटिल होती है बल्कि ऐसे मामलों में मुंह बंद होने के कारण एनेस्थीसिया देना भी काफी मुश्किल का काम होता है। उन्होंने आगे बताया कि ऐंकलोसिस के कारण मरीज का नीचे के जबड़ा दोनों तरफ उसके खोपड़ी के हड्डी से पूरी तरह से जुड़ी हुई थी।

पांच घंटे चला ऑपरेशन

डॉक्टर ने बताया कि रहमूल का करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन चला। जिसमें नीचे के जबड़े को दोनों तरफ खोपड़ी की हड्डी से अलग किया गया। उसके बाद ऑपरेशन कर चेहरे की विकृति को भी ठीक किया गया। ऑपरेशन के दौरान टीम में डॉ. अनुज, डॉ. ओपी श्रीवास्तव, डॉ राजेश रौशन और हेल्थ पाइंट ओटी टीम के सदस्य शामिल रहे।


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