अतिथि भरोसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, शिक्षकों के 80% पद खाली; ऐसे में कैसे हो शोध और पीएचडी?
रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 80% पद खाली हैं, जिससे केवल 40 स्थायी शिक्षकों के ...और पढ़ें

नीड बेस्ड शिक्षक और अतिथि शिक्षक कर रहे हैं कमी को पूरा।
HighLights
डीएसपीएमयू में 204 में से केवल 40 स्थायी शिक्षक कार्यरत।
शिक्षकों के 80 प्रतिशत पद खाली, शोध कार्य प्रभावित।
स्थायी शिक्षकों की कमी से 654 पीएचडी सीटें घटीं।
दिवाकर सिंह, रांची। रांची कालेज 2017 में अपग्रेड होकर डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय बन गया। कालेज तो विवि बन गया लेकिन इसके लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल पाया। समय के साथ शिक्षक सेवानिवृत होते चले गये और शिक्षकों की कमी और बढ़ती चली गयी।
वर्तमान में हाल ऐसा हो गया है कि शिक्षकों के कुल पद की तुलना में केवल 20 प्रतिशत ही स्थायी शिक्षक कार्य कर रहे हैं। बाकी शिक्षकों की कमी या तो नीड बेस्ड पूरा कर रहे हैं या अतिथि शिक्षक। लेकिन स्थायी शिक्षकों की कमी से शोध सहित अन्य काम प्रभावित हो रहे हैं।
विवि में 204 शिक्षकों की जरूरत, 40 से चल रहा है काम
डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सभी विषयों में कुल 204 स्थायी शिक्षकों की जरूरत है। लेकिन वर्तमान में केवल 40 स्थायी शिक्षकों से ही काम चल रहा है। कुल 164 शिक्षकों की कमी है। आंकड़ों के अनुसार शिक्षकों के 80 प्रतिशत पद खाली है।
इसके अलावा किसी-किसी विभाग में केवल एक ही स्थायी शिक्षक हैं। विवि में पठन-पाठन का कार्य तो सुचारू रूप से चल जा रहा है, समस्या आ रही है शोध सहित अन्य गतिविधियों में। वहीं इसमें भी 90 प्रतिशत असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। विवि में कुल 6 एसोसिएट प्रोफेसर ही बचे हुए हैं। जबकि प्रोफेसर एक भी नहीं है।
किस विषय में कितने स्थायी शिक्षक
क्र. सं. | विषय (Subject) | कुल शिक्षक |
|---|---|---|
1 | एंथ्रोपोलॉजी | 03 |
2 | बांग्ला | 01 |
3 | बॉटनी | 06 |
4 | केमिस्ट्री | 05 |
5 | इकोनॉमिक्स | 01 |
6 | इंग्लिश | 02 |
7 | ज्योग्राफी | 02 |
8 | हिंदी | 01 |
9 | हिस्ट्री | 01 |
10 | मैथ्स | 01 |
11 | फिलॉसफी | 01 |
12 | फिजिक्स | 04 |
13 | पॉलिटिकल साइंस | 04 |
14 | साइकोलॉजी | 01 |
15 | संस्कृत | 01 |
16 | टीआरएल (TRL) | 01 |
17 | उर्दू | 01 |
18 | जूलॉजी | 05 |
19 | जियोलॉजी | 00 |
20 | सोशियोलॉजी | 00 |
कुल योग | 41 |
शिक्षकों की कमी से हो रही है परेशानी
डीएसपीएमयू के यूजी-पीजी कोर्सों में 16 हजार स्टूडेंट्स नामांकित हैं। कामचलाऊ व्यवस्था के तहत लगभग चार दर्जन नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की गई थी, जिसके भरोसे यूजी-पीजी स्तर के क्लास संचालित किए जा रहे हैं।
स्थिति इतनी खराब है कि डीएसपीएमयू में एक भी प्रोफेसर रैंक के शिक्षक नहीं हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर गिने-चुने शिक्षक हैं। डीएसपीएमयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के सिलेबस के अनुसार स्नातक स्तर पर पढ़ाई हो रही है।
एनईपी का उद्देश्यों को पूरा करने के लिए छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी है। लेकिन यहां विवि शिक्षकों के दो तिहाई सृजित पद रिक्त हैं।
शोध पर पड़ रहा है असर, घट गई पीएचडी की 654 सीटें
स्थायी शिक्षकों की कमी का सीधा असर शोध पर पड़ रहा है। अगर विवि में अगर 164 शिक्षकों की बहाली हो जाती है तो पीएचडी के लिए भी कुल सीटें 704 हो जाती। वर्तमान में 48 सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है।
अगर 164 असिस्टेंट प्रोफेसर रहते तो 654 सीटें और उपलब्ध होती। क्योंकि एक असिस्टेंट प्रोफेसर के जिम्मे चार पीएचडी की सीटें होती हैं। लेकिन स्थायी शिक्षकों की कमी से ये सीटें उपलब्ध नहीं है। इसका खामियाजा शोध करने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
क्या कहता है विवि
पठन-पाठन में नीड बेस्ड और अतिथि शिक्षकों से काम चल जा रहा है, लेकिन शोध पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। स्थायी शिक्षकों के नहीं रहने से परेशानी तो है। हमारी कोशिश रहती है कि जो शिक्षक हैं उन्हीं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करायी जाए।
-डाॅ. राजीव मनोहर, कुलपति, डीएसपीएमयू
डीएसपीएमयू में पीजी नामांकन की दूसरी सूची जारी
डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कई पीजी विभागों के नामांकन की दूसरी सूची सोमवार को जारी कर दी गयी है। दूसरी नामांकन सूची के आधार पर संबंधित विभागों में 3 से 5 नवंबर तक नामांकन लिया जाएगा।
इसके लिए विवि के सभी विभागाध्यक्षों व समन्वयकों को निर्देश दिया गया है कि वो यूथ फेस्टिवल के दौरान नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर लें। विद्यार्थी विवि के वेबसाइट पर लिस्ट देख सकते हैं और इसके आधार पर संबंधित विभाग में नामांकन ले सकते हैं।
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