राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की कोर्ट में बुधवार को फर्जी नक्सली सरेंडर मामले की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा जवाब नहीं दाखिल किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि अगर अगली सुनवाई से पहले सरकार की ओर से सीलबंद जवाब दाखिल नहीं किया गया तो गृह सचिव को कोर्ट में हाजिर होना होगा। मामले की सुनवाई सात अगस्त को होगी।

इससे पूर्व सुनवाई के दौरान गृह विभाग के अधिवक्ता की ओर से समय की मांग की गई। जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस मामले में पहले ही बहुत समय दिया जा चुका है। दरअसल, इस संबंध में गृह मंत्रालय की ओर से सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई थी। रिपोर्ट की एक कॉपी राज्य सरकार को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मौखिक रूप से कहा था कि इस मामले में केंद्र सरकार व राज्य सरकार का रुख एक ही दिशा में होना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने उक्त रिपोर्ट पर गृह सचिव से जवाब मांगा था।

जानें, क्या है मामला

झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक की ओर से इस संबंध में याचिका दाखिल की गई है। जिसमें कहा गया है कि 514 आदिवासी युवक-युवतियों को नक्सली बताकर सरेंडर करा दिया गया। जिसकी जांच कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि नक्सल अभियान केंद्र की निगरानी में चलते हैं। सरेंडर भी उन्हीं की सहमति से होता है। इसी आलोक में कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया था।

 

Posted By: Sachin Mishra