CISF का बड़ा फैसला: रांची के नियंत्रण में कोल सेक्टर, 15 अक्टूबर से लागू हुआ कमांड; स्टील-पावर सेक्टर का भी विभाजन
सीआईएसएफ ने औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है, जिसके तहत कोल सेक्टर की जिम्मेदारी अब ...और पढ़ें

गुरुवार को डीआईजी सुमंत सिंह ने एनके-पिपरवार और मगध-आम्रपाली क्षेत्र का दौरा किया।
HighLights
सीआईएसएफ ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया।
कोल सेक्टर की सुरक्षा अब रांची महानिरीक्षक के अधीन होगी।
स्टील, पावर सेक्टर भी नए कमांड ढांचे में विभाजित किए गए।
जागरण टीम, पिपरवार/रांची। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। नया कमांड ढांचा गुरुवार से लागू हो गया है, जिसमें कोल सेक्टर की जिम्मेदारी पूर्वी खंड रांची के महानिरीक्षक को सौंपी गई है।
सीआईएसएफ दिल्ली मुख्यालय के आदेश के मुताबिक स्टील, कोल और पावर सेक्टर की इकाइयों को अब अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर नियंत्रित किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कोल सेक्टर में हुआ है।
बीसीसीएल धनबाद, सीसीएल करगली व मगध-आम्रपाली, एसईसीएल बिलासपुर, ईसीएल शीतलपुर, कोल माइनिंग हजारीबाग, एनसीएल सिंगरौली और नेवेली सहित कुल 22 कोल इकाइयों का प्रशासनिक नियंत्रण अब पूर्वी खंड रांची के महानिरीक्षक प्रबोध चंद्रा के पास होगा।
स्टील और पावर सेक्टर का बंटवारा
स्टील सेक्टर की 27 इकाइयां (बोकारो, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बर्नपुर, सलेम आदि) सेंट्रल सेक्टर भिलाई के महानिरीक्षक पीयूष पांडेय के अधीन आ गई हैं। पावर सेक्टर की करीब 54 इकाइयाँ (चंद्रपुरा, बोकारो थर्मल, ललपनिया, कोडरमा, पतरातू, बक्सर आदि) नॉर्थ ईस्ट सेक्टर जोन-1 कोलकाता के महानिरीक्षक ए.के. मोहनका के नियंत्रण में रहेंगी।
सीआईएसएफ मुख्यालय का कहना है कि यह बदलाव सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विशेषज्ञ और केंद्रित बनाने के लिए किया गया है। अधिकारियों और जवानों को एक खास क्षेत्र की सुरक्षा में दक्ष बनाने के साथ क्षेत्रीय स्तर पर आईजी और डीआईजी को ज्यादा प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे, ताकि जमीनी स्तर पर फैसले तेजी से लिए जा सकें।
रांची मुख्यालय के लिए यह फैसला खास मायने रखता है। झारखंड और आसपास के कोयला क्षेत्रों की सुरक्षा अब सीधे रांची से संचालित होगी। इससे कोयला चोरी, अवैध खनन और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर बेहतर निगरानी और समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है। नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो चुका है।
एनके-पिपरवार और मगध-आम्रपाली पहुंचे CISF के DIG सुमंत सिंह
कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से, सीआईएसएफ सीसीएल करगली के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सुमंत सिंह ने गुरुवार को एनके-पिपरवार और मगध-आम्रपाली क्षेत्र का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तथा आगामी चरण में बल की तैनाती, आवश्यक संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सीसीएल प्रबंधन के साथ विस्तृत चर्चा की। मगध-आम्रपाली क्षेत्र के दौरे के दौरान डीआइजी ने सीसीएल मगध के महाप्रबंधक राजीव रंजन से मुलाकात की।
बैठक में आगामी चरण में सीआइएसएफ की तैनाती की तैयारियों, सुरक्षा संबंधी समस्याओं और उनके समाधान पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, वाहनों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की गई।
उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराने तथा लंबित जरूरतों का त्वरित समाधान करने पर विशेष जोर दिया।
खदानों से रेलवे साइडिंग तक सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
एनके-पिपरवार पहुंचने पर उप महानिरीक्षक सुमंत सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीआईएसएफ की सी-कंपनी परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने बैरक, सीसीएल रेलवे साइडिंग और खदान क्षेत्रों का निरीक्षण कर वहां की सुरक्षा व्यवस्था तथा जवानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।
दौरे के दौरान सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ संसाधनों की उपलब्धता और आवश्यक सुधार के बिंदुओं पर भी ध्यान दिया गया। कोयला उत्पादन क्षेत्रों, खदानों और रेलवे साइडिंग की सुरक्षा को प्रभावी बनाए रखने के लिए सीआइएसएफ और सीसीएल प्रबंधन के बीच आपसी समन्वय को बेहद महत्वपूर्ण माना गया।
इस अवसर पर एनके-पिपरवार क्षेत्र के कमांडेंट अमित कुमार, उप कमांडेंट दिनेश कुमार और मगध-आम्रपाली इकाई के सहायक कमांडेंट सुभाष कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
