रांची : 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले की जाच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) शीघ्र ही खेल आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद के विरुद्ध चार्जशीट करेगी। आरके आनंद पर अभियोजन चलाने की स्वीकृति भी इसी हफ्ते मिल जाएगी। विधि-विभाग की सहमति के बाद स्वीकृति की फाइल मुख्यमंत्री के पास पहुंच चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि एसीबी को इसी हफ्ते स्वीकृति आदेश मिल जाएगी, क्योंकि मौखिक सहमति लगभग दे दी गई है।

एसीबी ने आरके आनंद के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिये थे। इन्हीं साक्ष्यों को आधार बनाकर एसीबी ने पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग से आरके आनंद के विरुद्ध चार्जशीट व अभियोजन चलाने की अनुमति मागी थी।

एसीबी ने तर्क दिया था कि राची में आयोजित राष्ट्रीय खेलों से संबंधित तैयारियों, समारोहों व वस्तुओं के क्रय में घोटाला हुआ था। इस मामले में एसीबी में तब निगरानी थाना काड संख्या 49/2010 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अनुसंधान में अन्य अभियुक्तों के अलावा प्राथमिकी अभियुक्त आरके आनंद के विरुद्ध भी काड सत्य पाया गया। उनपर चार्जशीट व अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।

एसीबी के अनुसार घटना के वक्त आरके आनंद राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष थे। उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। इसलिए उनके विरुद्ध अभियोजन चलाने के लिए स्वीकृति लेनी आवश्यक है। इस काड में अप्राथमिकी अभियुक्त सुविमल मुखोपाध्याय, एचएल दास, प्रेम कुमार चौधरी, शुकदेव सुबोध गाधी व अजीत जोइस लकड़ा के विरुद्ध भी चार्जशीट व अभियोजन के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारों से स्वीकृति मांगी गई है। इस काड का अनुसंधान जारी है।

प्राथमिकी अभियुक्त प्रकाश चंद्र मिश्र व सैयद मतलूब हाशमी के विरुद्ध आरोप पत्र 9 जनवरी 2015 को तथा मधुकात पाठक के विरुद्ध 14 अप्रैल 2018 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

34वा राष्ट्रीय खेल घोटाला 28.34 करोड़ रुपये का है। इसमें जरूरत से अधिक खेल सामग्री खरीदी गई थी। इसके साथ ही सामग्री अधिक मूल्य पर भी खरीदी गई थी।

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आरके आनंद पर यह है आरोप

आरके आनंद एनजीओसी के कार्यकारी अध्यक्ष थे। खेल की तैयारी और इसके आयोजन के दौरान उन्हें अक्सर राची आना पड़ता था। उन्हें राजकीय अतिथिशाला में ठहरने की व्यवस्था थी। सरकार ने ही परिवहन व सुरक्षा की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद आरके आनंद राजकीय अतिथिशाला में नहीं ठहरते थे। वे एक होटल में कई बार ठहरे, जिस पर 9.81 लाख रुपये खर्च हुए। इस राशि का भुगतान एनजीओसी ने किया। जाच रिपोर्ट में इसे सरकारी नियमों का उल्लंघन बताया गया। खेल घोटाले की जाच का काम जब निगरानी को दिया गया, तब आनंद के एक होटल में ठहरने से जुड़े कागजात भी निगरानी के हाथ लगे थे। चार साल तक मामले की छानबीन की गई थी।

Posted By: Jagran

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