पिपरवार में 21 एकड़ जमीन के बदले CCL में नौकरी पर विवाद, 21 साल बाद भी नहीं हुआ मामले का निपटारा
चतरा के पिपरवार क्षेत्र में सीसीएल द्वारा अधिग्रहित 21 एकड़ जमीन के बदले नौकरी पाने में कथित फर्जीवाड़े का मामला ...और पढ़ें

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पिपरवार में 21 एकड़ जमीन पर नौकरी फर्जीवाड़ा।
जाली हुकुमनामा, फर्जी दस्तावेजों से नौकरी का आरोप।
जागरण संवाददाता, पिपरवार (रांची)। चतरा जिले के टंडवा अंचल अंतर्गत सीसीएल पिपरवार क्षेत्र की बहेरा पंचायत स्थित सरैया मौजा में 21 एकड़ 21 डिसमिल जमीन के बदले नौकरी हासिल करने में कथित फर्जीवाड़े का मामला वर्षों से विवादों में है।
खतियानी रैयतों के वंशज अमृत उरांव ने आरोप लगाया है कि जाली हुकुमनामा और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुछ लोगों ने सीसीएल पिपरवार में नौकरी हासिल की। चतरा न्यायालय में मामला पहुंचने पर वर्ष 2005 में उनके पक्ष में फैसला आने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं होने पर रैयतों को रेलवे लाइन रोककर आंदोलन करना पड़ा।
अमृत उरांव के अनुसार, मौजा सरैया में रैयत झिरगा मोदी, पिता बलम मोदी के नाम से दर्ज खाता संख्या तीन की कुल 24 प्लॉटों वाली 21 एकड़ 21 डिसमिल भूमि का अधिग्रहण पिपरवार-मैक्लुस्कीगंज रेलवे लाइन निर्माण के लिए किया गया था। उक्त रेलमार्ग से वर्तमान में सीसीएल पिपरवार क्षेत्र में कोयले की ढुलाई होती है।
विवादित भूमि के प्लॉट नंबर 11, 12, 16, 18, 31, 36, 40, 41, 45, 46, 57, 59, 60, 61, 102, 104, 111, 112, 113, 116, 118, 120, 125 और 127 हैं। रैयत पक्ष का दावा है कि झारखंड सरकार द्वारा सत्यापित भूमि के मूल खतियान के आधार पर उनके पूर्वजों का अधिकार कायम है।
अमृत उरांव के मुताबिक, इस मामले में चतरा व्यवहार न्यायालय ने वर्ष 2005 में उनके पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद विपक्षी पक्ष ने झारखंड उच्च न्यायालय में मामला दर्ज कराया। करीब 21 वर्ष बीतने के बावजूद विवाद का अंतिम निराकरण नहीं हो सका है।
अमृत उरांव ने सीसीएल प्रबंधन, टंडवा अंचल, सिमरिया अनुमंडल प्रशासन, अपर समाहर्ता और चतरा उपायुक्त से कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा नौकरी से हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले से सीसीएल मुख्यालय, राज्य सरकार और कोयला मंत्रालय के वरीय अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।
ज्ञात हैं कि सीसीएल पिपरवार में पूर्व में भी फर्जीवाड़े के तहत नौकरी लिए जाने के मामले में हाई कोर्ट द्वारा पूर्व जीएम के परिजन सहित 18 सीसीएल कर्मी को नौकरी से निलंबन का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बिना इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
